विनोद नेताम (वरिष्ठ पत्रकार)
नई दिल्ली/ विशेष रिपोर्ट_
11 साल का विकास
5 ट्रिलियन इकॉनमी
संसार की 4 थी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और बावजूद इसके आम आदमी के पास आखिरकार बचा क्या घं.. टा?
एक तरफ जंहा जमीनी धरातल पर पूरे देश भर के अंदर में निवास करने वाले हर भारतीय नागरिकों के प्रति व्यक्ति आय(per person income) बंग्लादेशी नागरिकों के और श्रीलंका जैसे देशों में रहने वाले नागरिकों से भी बत्तर होते हूए साफ दिखाई देने लगी है।
वहीं भारतीय बाजार और बैंक अब अमृतकाल के इस दौर में पैसे और कर्ज की मार से तहस नहस होने की कगार पर पहुंच चुकी है।
ऐसे में बरसो से कृषि क्षेत्र देश के अर्थव्यवस्था को एक हिसाब से सहारा देने के लिए मजबूत ईकाई के तौर पर जाना व पहचाना जाता रहा है और देश के अन्नदाता किसान इस काम को बखूबी तरीके से करते हुए आ रहे है।

किंन्तु आम बजट में जिस तरह से मोदी सरकार ने कृषि क्षेत्र को नजरांदाजी का झूनझूना पकड़ाया है, उसे देखकर कतई नहीं लगता है कि भारी भरकम अमेरिकी डालर की टैक्स से सुसज्जित अमेरिकी किसानों का कृषि उत्पात अमिर देश के (दुनिया के पांचवी बड़ी इकोनामी) गरीब अन्नदाता आम भारतीय किसान खरीद पायेगें।
ज्ञात हो कि अमेरिका ना सिर्फ अर्थव्यवस्था और ताकत के क्षेत्र में पुरे संसार भर के अंदर अव्वल है बल्कि अमेरिका की कृषि सेक्टर भी काफी मजबूत है,जबकि हमारे देश में भीतर में किसानों की हालत क्या से क्या बांकी रह गई है यह बताने की आवश्यकता नही है।
खैर आगे आने दिनों में अमेरिका का कृषि उत्पाद भारतीय बाजारों में दिखाई देना शुरू हो जायेगा तब तक खैर मनाईये।
“मजदूरों को लहसुन भी चाहिए और प्याज भी चाहिए,भले वित्तमंत्री जी को हलवा पंसद क्यूँ ना हो”
देश के भीतर में मजदूरों की हालत जमीनी स्तर पर काफी दयनीय है,हालांकी सरकारी दावा कागज पर बढ़िया दिखाये जाने का चलन बन चुका है,लेकिन हकीकत की धरातल पर जो मंजर पसरा हुआ है वह बंया तक नहीं किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा विगत कई महिनों से धान खरीदी का कार्यक्रम चलाया गया,जिसमे बहुत किसानों को अपने मेहनत और पसीने से उपजाये हुए धान को बेचने में काफी समय लगा है।इस दौरान उनके द्वारा समय मजदूरों को भी उनकी मजदूरी का भुगतान काफी देर से किया गया है।
वहीं सरकार के द्वारा मनरेगा के नियमों में बदलाव किए जाने से आगे आने वाले दिनों में मजदूरों को काफी दिक्कतों का सामना भी करना पडेगा।भारत की पहचान सदियों से खेत और खलिहान को लेकर चली आ रही है।इस बीच ध्यान रहे,खेत और खलिहान बगैर मजदूर के जोता नहीं जा सकता है।
किंन्तु अमृतकाल के इस दौर में अब भारत की पहचान बड़े बड़े चंद अमीर लोगों से भी होने लगी है। चूंकि देश के भीतर में मौजूद ज्यादातर अन्नदाता आर्थिक रूप से काफी कमजोर बताए जाते है। बड़े बुजुर्ग कहा करते है कि भारत की मिट्टी हर भारत वासी के लिए आन बान और शान है।
ऐसे में अपनी सरजंमी के लिये प्राण तक निवछावर कर देना हर भारतवासियों के लिये ना सिर्फ एक जिम्मेदारी है बल्कि नैतिक अधिकार भी है।अब सोंचने वाली बात यह भी एक है कि आखिरकार देश के भीतर मौजूद रहने वाले गरीब गुरबत अपनी सरजंमी के लिए आखिर ऐसा क्या काम करे जिससे उनकी जिम्मेदारी भी पुरा हो जाए और उनका अधिकार भी मिल जाए।
आखिर में बजट के जरिये मध्यम वर्ग को मिलने वाले लाभ:
1. बेरोजगारों को आयकर नहीं देना होगा।
2. बेघरों के लिए मकान कर और जल कर पूरी तरह माफ कर दिया गया है।
3. जिनके पास वाहन नहीं है, उन्हें मुफ्त पेट्रोल मिलेगा।
4. साइकिल चालकों से सड़क कर और टोल कर नहीं लिया जाएगा।
5. निःसंतान दंपतियों के बच्चों की शिक्षा मुफ्त होगी।
6. सांस लेने पर कोई जीएसटी नहीं लगेगा।
7. अंतिम संस्कार की प्रार्थना पर कोई जीएसटी नहीं लगेगा।
8. व्यक्तिगत उपभोग के लिए घर में बने भोजन पर कोई सेवा कर नहीं लगेगा।
9. छत पर पड़ने वाली धूप पर कोई कर नहीं लगेगा।
10. बैंक स्टेटमेंट देखने के लिए बैंक जाने पर कोई सेवा कर नहीं लगेगा।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

