विनोद नेताम

छत्तीसगढ़|विशेष रिपोर्ट _

राज्य में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (HSRP) को लेकर इन दिनों सख्ती अपने चरम पर है। आम नागरिकों की गाड़ियां सड़कों पर रोकी जा रही हैं, चालान काटे जा रहे हैं, नियमों का हवाला देकर डर का माहौल बनाया जा रहा है। लेकिन इसी बीच अखबार में प्रकाशित तस्वीरें एक ऐसा सच उजागर करती हैं, जो इस पूरी मुहिम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर देता है।
तस्वीरें साफ गवाही दे रही हैं,जिन विभागों पर कानून लागू कराने की जिम्मेदारी है, वही खुद कानून की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं। पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ियां, डायल-112, स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के वाहन बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के सड़कों पर फर्राटे भर रहे हैं। सवाल सीधा है,क्या कानून सिर्फ आम आदमी के लिए है? क्या सरकारी गाड़ियां कानून से ऊपर हैं?

सरकार ने 2019 के बाद से HSRP को अनिवार्य बताया, नियम तोड़ने पर 5 हजार से 10 हजार तक के जुर्माने का प्रावधान किया। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह “सख्ती” एकतरफा है। आम आदमी की जेब ढीली कराई जा रही है, जबकि सरकारी तंत्र खुद नियमों को ताक पर रखकर “विशेषाधिकार” का मजा ले रहा है।
यह दोहरा चरित्र सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्था के भीतर गहराई तक बैठी मानसिकता को उजागर करता है।
“हम कानून बनाते हैं, इसलिए हम उस पर चलने के लिए बाध्य नहीं हैं।” यही सोच लोकतंत्र की जड़ों को खोखला करती है।
अगर पुलिस ही नियमों का पालन नहीं करेगी, तो जनता से पालन की उम्मीद किस नैतिक आधार पर की जाएगी? जब सरकारी गाड़ियां बिना HSRP के खुलेआम घूमेंगी, तो आम नागरिक क्यों इसे गंभीरता से लेगा? यह सिर्फ एक नंबर प्लेट का मामला नहीं, यह कानून की समानता और शासन की नैतिकता का सवाल है।
और सबसे बड़ा सवाल क्या यह महज लापरवाही है या जानबूझकर बनाई गई “राजस्व वसूली नीति”? जहां नियमों की आड़ में आम आदमी पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है, जबकि सरकारी तंत्र खुद उस नियम से बच निकल रहा है।
सरकार और प्रशासन को यह समझना होगा कि कानून का सम्मान डंडे से नहीं, उदाहरण से स्थापित होता है।
पहले अपनी गाड़ियों पर HSRP लगवाइए, फिर जनता से सवाल कीजिए।
वरना जनता पूछेगी
“जब सैंया ही कोतवाल बन जाए, तो फिर कानून का रखवाला कौन?”

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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