विनोद नेताम(वरिष्ठ पत्रकार)
छत्तीसगढ़/गरियाबंद/ विशेष रिपोर्ट _
गरियाबंद जिले के राजिम क्षेत्र में हुई हिंसक झड़प सिर्फ दो गुटों का टकराव नहीं, बल्कि प्रशासन और पुलिस व्यवस्था की बड़ी नाकामी है।
सवाल उठता है कि मामूली विवाद के बाद हालात इतने बेकाबू कैसे हो गए कि आगजनी और दहशत का माहौल बन गया?
क्या स्थानीय पुलिस को पहले से तनाव की जानकारी नहीं थी,या फिर जानबूझकर अनदेखी की गई?
जब गांव में कर्फ्यू जैसे हालात बनने पड़े, तब हस्तक्षेप का क्या मतलब रह जाता है?
राजिम और फिंगेश्वर से अतिरिक्त बल बुलाना यह साबित करता है कि स्थिति को समय रहते संभाला नहीं गया। सबसे बड़ा सवाल उन ग्रामीणों का है, जिनके घर और गाड़ियाँ जल गईं उनकी भरपाई और सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या प्रशासन केवल हालात काबू में होने का इंतज़ार करेगा, या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस और जवाबदेह कार्रवाई भी करेगा?
रायपुर : छत्तीसगढ़ के गरियाबंद ज़िले के दुतकैया गांव में रविवार शाम हिंसा भड़क उठी, जब एक भीड़ ने कथित तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के घरों में आग लगा दी,बताया गया है कि इस दौरान पुलिस की एक टीम ने कई बच्चों समेत 20 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला. इस घटना में सात पुलिसकर्मी घायल हो गए।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक,दुतकैया गांव में दंगे की शुरुआत रविवार तड़के हुई घटनाओं से हुई, जब चार अलग-अलग जगहों पर चार लोगों पर कथित तौर पर हमला किया गया और दो लोगों से उनके मोबाइल फोन लूट लिए गए.
इन घटनाओं के तीन आरोपियों की पहचान दुतकैया के आरिफ खान (18) और सलीम खान (23) तथा रायपुर के इमरान सिद्दीकी (18) के रूप में हुई है।
इसके बाद उसी दिन शाम 4 बजे से रात 11.30 बजे के बीच दर्जनों ग्रामीणों ने कथित तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय के छह घरों पर हमला किया.
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार,पुलिस ने बताया कि सैकड़ों लोगों की भीड़ से महिलाओं और बच्चों सहित दो दर्जन से अधिक लोगों को कई घंटों तक बचाते हुए कम से कम सात पुलिसकर्मी घायल हो गए।
पुलिस के मुताबिक, यह सांप्रदायिक झड़प उन घटनाओं की कड़ी का नतीजा थी जो कुछ घंटे पहले शुरू हुई थीं, जब तीन लोगों ने – जिनमें से एक मंदिर में तोड़फोड़ के एक मामले में ज़मानत पर बाहर था – कथित तौर पर स्थानीय लोगों पर हमला किया।
गरियाबंद के पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर ने सोमवार (2 फरवरी) को पत्रकारों को बताया कि 2024 में दुतकैया निवासी आरिफ़ ख़ान को माना किशोर सुधार गृह में रखा गया था, जब उस पर और दो अन्य लोगों पर गांव के चवेश्वर शिव मंदिर में तोड़फोड़ का आरोप लगा था।
अखबार के अनुसार, एक अन्य अधिकारी ने बताया कि अब 18 साल के खान को उसी साल जमानत मिल गई थी, लेकिन वह रविवार (1 फरवरी) की सुबह तक गांव नहीं लौटा था, जब उसने और रायपुर के उसके दो साथियों ने कथित तौर पर चार लोगों पर हमला किया, जिसमें तोड़फोड़ मामले का एक चश्मदीद गवाह भी शामिल था
हालांकि पुलिस ने ख़ान और उसके साथियों के ख़िलाफ़ चार मामले दर्ज किए और ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उसे गिरफ़्तार किया जाएगा, लेकिन एक भीड़ ने गांव में ख़ान के घर में तोड़फोड़ कर दी. इसके बाद पुलिस की एक टीम गांव भेजी गई और उन्होंने ग्रामीणों को किसी भी तरह की और उकसाने वाली कार्रवाई से बचने की सलाह दी।
लेकिन शांति ज़्यादा देर नहीं टिकी. जल्द ही दुतकैया और आसपास के गांवों से सैकड़ों लोगों की एक बड़ी भीड़ मौके पर इकट्ठा हो गई. लाठी, ईंट, पत्थर और केरोसिन की बोतलें लेकर वे कथित तौर पर उन 10 मुस्लिम परिवारों के घरों में घुसने की कोशिश करने लगे,जिन्होंने बचने के लिए खुद को अपने-अपने घरों में बंद कर लिया था।
एक पुलिस अधिकारी ने कहा भीड़ ने गाड़ियों में आग लगा दी और मांग की कि उन्हें मुसलमानों के घरों में घुसने दिया जाए. हम न सिर्फ़ संख्या में कम थे।
बल्कि राज्य में राजिम कुंभ के चलते पुलिस बल की भी कमी थी. अगले कुछ घंटों तक हम डटे रहे और यह सुनिश्चित किया कि भीड़ घरों में न घुस सके और महिलाओं व बच्चों सहित निवासियों को कोई नुकसान न पहुंचे।
जब पुलिसकर्मी पहरा दे रहे थे, तब भीड़ ने पत्थरबाज़ी की और पास के घरों से अंदर घुसने की कोशिश भी की. लेकिन पुलिस टीमों ने उन्हें रोके रखा, जब तक कि रात 9 बजे तक दो किश्तों में अतिरिक्त बल नहीं पहुंच गया।
अधिकारी ने कहा, ‘भीड़ को शांत कराने की कोशिशें नाकाम रहीं. हमने फंसे हुए पीड़ितों को एक जगह इकट्ठा करके निकालना शुरू किया।
उनके अनुसार, आख़िरी दल के पहुंचने के बाद ही पुलिस ने बल प्रयोग किया और भीड़ को तितर-बितर किया, साथ ही करीब 20 लोगों को बस में बैठाकर सुरक्षित निकाला. इन परिवारों के कम से कम दो वयस्क सदस्य घायल हुए. इसके बाद पुलिस को पता चला कि छह या सात बच्चों का एक समूह एक मदरसे में फंसा हुआ है. उन्हें बाद में बचा लिया गया, लेकिन इस दौरान छह पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आईं।
हालांकि स्थिति आधी रात के आसपास काबू में आ गई थी और पुलिस लौटने की तैयारी कर रही थी, तभी भीड़ में शामिल एक महिला ने पुलिसकर्मी पर ईंट फेंक दी, जिससे उसके सिर में गंभीर चोट आई।
एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि 2024 की घटना के बाद ख़ान से जुड़े परिवारों ने संभावित प्रतिक्रिया के डर से गांव छोड़ दिया था, लेकिन प्रशासन ने उन्हें वापस लौटने के लिए मना लिया था. ग्रामीणों का कहना है कि दोनों समुदायों के बीच तनाव था, लेकिन इसके कारण आर्थिक और अन्य मुद्दे थे।
अखबार के अनुसार, सोमवार (2 फरवरी) को पुलिस द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘इस बीच, उपरोक्त घटनाओं के चलते दुतकैया के ग्रामीणों में अशांति फैल गई और आरोपी के घर के पास भीड़ जमा हो गई. सूचना मिलते ही पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचा, स्थिति को काबू में किया और भीड़ को तितर-बितर किया. जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए उपद्रवी भीड़ को हटाने हेतु आवश्यक न्यूनतम बल का प्रयोग किया गया और घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।
दंगे के सिलसिले में दो एफआईआर दर्ज की गई हैं।
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ड्यूटी पर तैनात पुलिस बल पर हमला करने और उन्हें घायल करने वालों के खिलाफ फिलहाल कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।
इस बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने ‘कानून-व्यवस्था के पूरी तरह ध्वस्त होने’ का आरोप लगाते हुए लक्षित आगजनी और स्थानीय आरोपियों द्वारा कथित तौर पर फैलाए गए आतंक पर गहरी चिंता जताई।
बैज ने कहा, ‘प्रशासनिक लापरवाही और बिगड़ते सुरक्षा माहौल का सीधा नतीजा है कि एक दर्जन घर जला दिए गए और कई पुलिसकर्मी घायल हुए।
वहीं, राज्य के कैबिनेट मंत्री दयालदास बघेल ने इस घटना को दो समुदायों के बीच पुराने विवाद से उपजा कथित टकराव बताया,उन्होंने कहा अब सब कुछ नियंत्रण में है।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

