विनोद नेताम (वरिष्ठ पत्रकार)
विशेष रिपोर्ट_
छत्तीसगढ़/बालोद/गुरुर_
ग्राम अरकार के माटी पुत्र किसानों ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अपने बीच में पाकर एक बार फिर कहा कका जिंदा हे रे….
बालोद जिले के सियासी सरजमी पर गुरूर विकासखंड क्षेत्र का नाम बड़े शान से लिया जाता रहा हैं।
धमतरी विधानसभा क्षेत्र, पाटन विधानसभा क्षेत्र,भानुप्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र सहित बालोद जिला के भीतर मौजूद सभी विधानसभा क्षेत्र से लगा हुआ संजारी बालोद विधानसभा क्षेत्र का यह सियासी रणभूमी अपने आप में ही सियासी तौर पर काफी मजबूत है। शायद इसलिए इस क्षेत्र को राजनितिक रणभूमी के रूप में भी पहचाना जाता है। अवगत हो कि कांग्रेस पार्टी की अपराजय जीत ने इस सरजंमी को अबतक भाजपा मुक्त बनाकर रखा हुआ है। ऐसे में कांग्रेस पार्टी के लिए यह जगह जितना मायने रखता है, उतना ही मायने बीजेपी के लिए भी माना जा सकता है।
बहरहाल इन दिनों धान के मसले को लेकर पूरे बालोद जिला भर के अंदर बवाल मचा हुआ दिखाई दे रहा है।
इस बीच जिले के ज्यादातर किसान धान खरीदी केन्द्रों से लेकर सड़क पर उतरते हुये रोजाना देखे जा रहे है।
सड़क से लेकर धान खरीदी केन्द्रों में मची हुई गहमागहमी को देखकर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का आगमन बिते कल शाम को गुरूर विकासखंड क्षेत्र के ग्राम अरकार में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता संजय प्रकाश चौधरी के विशेष बुलावे पर हुआ था।
इस दौरान छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किसानों के साथ हो रही नाइंसाफी के खिलाफ मौजूदा विष्णुदेव साय सरकार को आंय बांय तरिके से सीधा सीधा सांय सांय जोंता।
जाहिर सी बात है कि इससे पहले कांग्रेस पार्टी की भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के भीतर में सरकार हुआ करती थी तब ऐसी गहमा गहमी की स्तिथियों सहित किसानों को किसी तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पडा था बल्कि भूपेश बघेल सरकार की किसानों के प्रति बढिया सोंच का ही यह नतीजा है कि आज छत्तीसगढ़ के अंदर धान का इतना किमत मिल रहा है।
“धान के मसले पर हुई बवाल ने एक बार फिर बीजेपी को पीछे धकेला “
जिले के किसानों में बीजेपी सरकार को लेकर विगत कई महिनों से नारजगी व्यापत होने की खबर जगजाहिर है और इस खबर के पीछे का मुख्य कारण भाजपा के द्वारा किसानों के प्रति बरती गई अनदेखी को भी माना जा रहा है।
बता दे कि अंचल भीतर में मौजूद किसानों ने पहले तो खाद के लिये संघर्ष किया फिर बढ़ी हुई बिजली ने किसानों की संघर्ष को कम नहीं दिया और जब धान ले देकर पक गये तब बेंचने के लिये भी उन्हें संघर्ष ही करना पड़ा है। हैरत की बात एक यह भी सामने आई है जिसमें भाजपा के स्थानीय नेता तक भी सरकार के किसान विरोधी नितीयों से तिलमिलाये हुए देखे जा सकते है। ऐसे में कांग्रेस पार्टी को बैठे बैठे ही एक बड़ा मुद्दा मिल गया है और क्षेत्र के भीतर मौजूद कांग्रेस के ज्यादातर नेता पहले की अपेक्षा अब ज्यादा एक्टिव नजर आने लग गये है।
वंही बीजेपी के स्थानीय नेताओं की हालत धान पर मची हुई बवाल के वजह से शांत और स्थिर दिखाई दे रही है।
भाजपा के अंदर मौजूद ज्यादातर नेताओं की माने तों वे किसानों के साथ है और दुखी है इसलिए हम कुछ नहीं कह पायेगें।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

