विनोद नेताम (वरिष्ठ पत्रकार)
छत्तीसगढ़/बालोद/लोहारा/दल्ली राजहरा/विशेष रिपोर्ट_

भारत को न सिर्फ सनातन धर्म की पवित्र धरा माना गया है बल्कि भारत की पहचान भी सनातन धर्म से ही होती है।

सदियों से इस धरती पर ऋषि मुनि साधु संत जीवन व्यतीत करते हुये भगवत भजन के साथ समाजिक चेतना का कार्य करते हुये आ रहे है।
हमारे ऋषि मुनियों और साधु संतों की कठिन त्याग व तपस्या के बलबूते भारत को एक नई भी मिली हुई है,किंतु अमृतकाल के इस दौर में आजकल एक से बढ़कर एक स्वंभू ऋषि मुनि और साधू व संतों को बड़े ही कट्टरता पुर्वक देखे जा रहे है, जो कि कंहा तक सही है यह तय करना समाज का नैतिक जवाबदेही है।
गौरतलब हो कि समाज सदियों से साधु संतों और ऋषि मुनियो का आदर करता हुआ आया है और आज भी आदर बनाये रखने के लिये समाज प्रतिबद्ध है,लेकिन कलयुग के इस दौर में समाज के भीतर साधू संतों और ऋषि मुनियों को भी यह समझना होगा कि समाज को जबरन आदर नहीं करवाया जा सकता है।

मामला 2022 आदिवासी क्षेत्र ग्राम तूंएगोदी का है।

आदिवासी अपने पुरानी परंपरा के साथ पूजा अर्चना कर रहे थे।तभी उन लोगों के ऊपर जानलेवा हमला किया गया था।

यह मामला जामड़ी पाटेश्वर धाम से जुड़ा हुआ।

अब भाजपा सरकार इस मामले को राजनीतिक विवाद का रूप देकर इसे जड़ से खत्म करने मंत्री परिषद् में प्रस्ताव हुआ पारित

भाजपा सरकार के इस फैसले से नाराज आदिवासी समाज फिर अपने हक और अधिकार के लिए उतरे मैदान पर।

सुबह 4 बजे से पैदल चल कर बालोद कलेक्ट्रेट के सामने बैठे पूरे आदिवासी समाज।

जामड़ी पाटेश्वर धाम से जुडे हूए मामले जो कि तूंएगोदी कांड के तौर पर जाना जाता है,उक्त मामले को भाजपा सरकार के द्वारा राजनितिक विवाद की संज्ञा दिये जाने व मामला को खत्म करने की मंशा पर अब बवाल मचने लगा है।
दरअसल वर्ष 2022 में बालोद जिले के पांचवी अनुसूची क्षेत्र अंतर्गत ग्राम तूएगोंदी के भीतर में आयोजित रुढ़ी प्रथा के अनुसार पुजा अनुष्ठान के दौरान आदिवासियों पर जानलेवा हमला किया गया था।इस जानलेवा हमले में कई आदिवासियों को गंभीर चोट आई थी तथा कई आदिवासियों का सर व माथा फोड़ दिया गया था। यह घटनाक्रम किसी की नजरिए से राजनितिक आंदोलन की श्रेणी में नहीं गीना जा सकता है।

बावजूद इसके भाजपा सरकार इस मामले को राजनितिक विवाद की श्रेणी में लाकर रफादफा करना चाह रही है जिसके चलते तूंएगोदी क्षेत्र के आदीवासीयों द्वारा बकायदा इस प्रकरण में सरकार की बदली हुई नियत को लेकर विरोध प्रदर्शन करते हुए कलेक्टर कार्यालय बालोद का घेराव करने की सूचना जग जाहिर है।

वंही आंदोलन में शामिल आदिवासी समाज के पदाधिकारीयों की माने तो भाजपा सरकार आदिवासी मुख्यमंत्री के आड़ में आदिवासियों की जल जंगल और जमीन के साथ साथ आदिवासी सभ्यता और संस्कृति के साथ खिलवाड़ करने वाले लोगों को संरक्षण देने में लगी हुई है।

जामड़ी पाटेश्वर धाम विवाद को भाजपा के नेता गण आदिवासी समाज के पक्ष में नहीं बल्कि आदिवासियों के साथ अन्याय करने वाले लोगों के पक्ष में करने में लगी हुई है।

आदीवासी समाज भाजपा की नियत को समझ चुकी है।अतः जब तक हमें इंसाफ नहीं मिलेगा तब तक हम अपनी लड़ाई को सरकार के समक्ष जारी रखेगे।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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