छत्तीसगढ़/ विशेष रिपोर्ट_

पुरूर मिर्रिटोला भाजपा मंडल अध्यक्ष टुकेश्वर पांडे ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ निरंतर विकास की ओर अग्रसर है। उन्होंने मुख्यमंत्री के स्वस्थ, दीर्घायु एवं सफल जीवन की कामना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में प्रदेश नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक विकास की रोशनी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में राज्य में सुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा मिला है।

उसके पूरे जीवन काल पर विशेष प्रकाश डालते हुए बताया कि
1990-998 अविभाजित मध्य प्रदेश विधानसभा सदस्य के रूप में दो कार्यकाल तथा 1999 के 13वीं लोकसभा में निर्वाचित 1999-2000 सदन की अनुपस्थिति समिति तथा खाद्य,नागरिक आपूर्ति और सार्वजनिक वितरण समिति के प्रमुख सदस्य। 2000-2004 कृषि मंत्रालय की परामर्श समिति के सदस्य।
2004 14 वीं लोकसभा के लिए पुन: निर्वाचित (दूसरा कार्यकाल), सूचना प्रौद्योगिकी समिति के सदस्य।
5 अगस्त 2007 जल संसाधन समिति के सदस्य 2009 15वीं लोकसभा के लिए पुन निर्वाचित (तीसरा कार्यकाल)31 अगस्त 2009 वाणिज्य समिति के सदस्य2014, 16वीं लोकसभा के लिए पुनः निर्वाचित (चौथा कार्यकाल)नवंबर 2014 खान और इस्पात मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री 5 जुलाई 2016 केंद्रीय राज्य मंत्री,इस्पात मंत्रालय3 दिसंबर 2023 छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदस्य निर्वाचित10 दिसंबर 2023 छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद की शपथ।
चार बार सांसद, फिर CM…कैसे बदली साय की सियासी किस्मत?
जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

विष्णु देव साय का जन्म 21 फरवरी 1964 को छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के फरसाबहार विकासखंड के ग्राम बगिया में किसान पिता राम प्रसाद साय और माता जसमनी देवी साय के घर हुआ। उनकी शादी 27 मई 1991 को कौशल्या देवी साय से हुई तथा उनके एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं। साय ने जशपुर जिले के कुनकुरी से हायर सेकेंडरी तक शिक्षा प्राप्त की।
पंचायत से विधानसभा तक का सफर
साल 1989 में अविभाजित मध्यप्रदेश की बगिया ग्राम पंचायत में पंच के रूप में उन्होंने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। वर्ष 1990 में वे ग्राम पंचायत बगिया के निर्विरोध सरपंच चुने गए।इसी वर्ष वे तपकरा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक निर्वाचित हुए। 1990 से 1998 तक वे अविभाजित मध्यप्रदेश की तपकरा सीट से दो बार विधायक रहे और क्षेत्रीय राजनीति में अपनी पहचान मजबूत की। छत्तीसगढ़ राज्य का गठन वर्ष 2000 में हुआ,जबकि साय दिसंबर 2023 में प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।चार बार सांसद और केंद्र में मंत्री विष्णु देव साय 1999 में रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए. इसके बाद वे 13वीं (1999), 14वीं (2004), 15वीं (2009) और 16वीं (2014) लोकसभा के सदस्य रहे. 27 मई 2014 से 2019 तक उन्होंने केंद्र सरकार में इस्पात, खान,श्रम और रोजगार मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई।
साय ऐसे परिवार से आते हैं जिसकी राजनीति में पृष्ठभूमि रही है। उनके बड़े पिता नरहरि प्रसाद साय विधायक और बाद में सांसद रहे, इसके साथ ही उन्होंने केंद्र में संचार राज्यमंत्री के रूप में भी कार्य किया। केदारनाथ साय तपकरा से विधायक रहे, जबकि उनके दादा बुधनाथ साय 1947 से 1952 तक विधायक रहे थे।
लखीराम अग्रवाल का मार्गदर्शन
अविभाजित मध्यप्रदेश में भाजपा के वरिष्ठ नेता लखी राम अग्रवाल को साय का राजनीतिक मार्गदर्शक माना जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने साय जैसे शांत और संगठननिष्ठ नेता को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1990 में विधानसभा टिकट दिलाने में भी उनका समर्थन निर्णायक रहा। साय को अक्सर उनका मानस पुत्र कहा जाता है। संगठनात्मक अनुशासन और विचारधारा के प्रति निष्ठा उनकी पहचान रही है।
2023 का चुनाव और सीएम पद तक का सफर
2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले साय को घोषणा पत्र समिति सहित कई अहम जिम्मेदारियां दी गईं।उन्होंने बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया। आदिवासी समाज से आने वाले साय को भाजपा की रणनीति के तहत प्रमुख चेहरा बनाया गया। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के बाद नेतृत्व परिवर्तन के दौर में एक संतुलित और संगठननिष्ठ चेहरे की तलाश साय पर आकर रुकी।
चुनावी रैली के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का यह बयान कि “आप इन्हें जिताइये, इन्हें बड़ा आदमी हम बनाएंगे” चर्चा में रहा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार साय को पहले से प्रमुख जिम्मेदारी देने की रणनीति तैयार थी।दिसंबर 2023 में भाजपा की जीत के बाद उन्हें विधायक दल का नेता चुना गया और उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

अजातशत्रु’ छवि
विष्णुदेव साय को पार्टी के भीतर संतुलित और विवादों से दूर रहने वाले नेता के रूप में देखा जाता है। विभिन्न गुटों के बीच स्वीकार्यता उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यही छवि हाईकमान के लिए निर्णायक कारक बनी।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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