Vinod Netam
नई दिल्ली । विशेष रिपोर्ट_
(Chhattisgarh junction)क्या यह सिर्फ सुरक्षा का कदम है या फिर असहमति की आवाज़ों पर पहले से नकेल कसने की तैयारी?
पत्र में क्या कहा गया?
◆ सभी राज्यों को संभावित हिंसा को लेकर सतर्क रहने को कहा गया।
◆ “ईरान समर्थक कट्टरपंथी उपदेशकों” की पहचान कर कार्रवाई के निर्देश।
◆ कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर सख्ती की चेतावनी।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव – Israel, United States और ईरान के बीच टकराव का हवाला देकर केंद्र ने राज्यों को चौकन्ना रहने को कहा है।
लेकिन बड़ा सवाल…
क्या सरकार को भारत की जनता पर भरोसा नहीं?
क्या हर विरोध या बयान को “कट्टरपंथ” बताकर दमन की तैयारी की जा रही है?
और क्यों हर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के बाद देश के भीतर डर का माहौल खड़ा किया जाता है?
आलोचकों का कहना है कि यह कदम कानून-व्यवस्था से ज्यादा “निगरानी राजनीति” का हिस्सा दिखता है – जहां पहले खतरे का नैरेटिव गढ़ा जाता है, फिर सख्ती को जायज़ ठहराया जाता है।
समर्थक कहेंगे – सुरक्षा पहले, राजनीति बाद में।
विरोधी पूछेंगे – सुरक्षा के नाम पर असहमति कुचलने की स्क्रिप्ट तो नहीं?
एक बात साफ है: पश्चिम एशिया की जंग का असर अब दिल्ली की फाइलों तक पहुंच चुका है।

अब देखना यह है कि राज्यों में यह ‘अलर्ट’ शांति बनाए रखता है या नई बहसों को जन्म देता है

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

