Vinod Netam
छत्तीसगढ़। विशेष रिपोर्ट
रायपुर त्योहार गुजर गए, लेकिन वेतन नहीं आया। गांव-गांव में स्वास्थ्य की मशाल जलाने वाली मितानिन कार्यकर्ताओं को महीनों से भुगतान का इंतज़ार है। खबर के मुताबिक (दैनिक भास्कर, रायपुर), नेशनल हेल्थ मिशन के तहत काम करने वाली महिलाओं को दिवाली के बाद होली भी सूनी ही काटनी पड़ी। सवाल सीधा है,जब जमीनी सिपाहियों को ही उनका हक़ नहीं मिल रहा, तो “बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था” का दावा किस भरोसे पर?

स्वास्थ्य भवन के बाहर बैठी मितानिनों की पीड़ा सिर्फ बकाया वेतन की नहीं, बल्कि सम्मान की भी है। यही महिलाएं गर्भवती माताओं की देखभाल से लेकर टीकाकरण और पोषण अभियान तक, हर मोर्चे पर सरकार की योजनाओं को जमीन पर उतारती हैं। लेकिन भुगतान के नाम पर फाइलें घूमती रहीं, आदेशों की बात होती रही और “तकनीकी कारणों” का राग अलापा जाता रहा।
“डबल इंजन” की रफ्तार या जमीनी ब्रेक?
केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार और राज्य में भाजपा नेतृत्व,दोनों स्तर पर स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण की गारंटी के दावे किए जाते हैं। मगर जमीनी हकीकत यह है कि जिनके कंधों पर इन गारंटियों का भार है, वही अपने घर का चूल्हा जलाने को मोहताज हैं। यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि संवेदनहीनता की मिसाल बनती जा रही है।
जवाबदेही से बचने की कोशिश?
रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों के सामने जब मितानिनों ने सवाल उठाए तो ठोस जवाब नहीं मिल सका। वेतन कब मिलेगा – इसका स्पष्ट समय नहीं। आखिर कब तक “आदेश जारी होगा” जैसे वाक्यों से काम चलेगा? क्या त्योहारों में भी इन कर्मियों को आश्वासन ही परोसा जाएगा?
बड़ा सवाल
75 हजार से अधिक मितानिनों की मेहनत पर खड़ी स्वास्थ्य व्यवस्था में भुगतान की व्यवस्था क्यों चरमराई?
यदि बजट है तो भुगतान क्यों नहीं?
यदि बजट नहीं है तो घोषणाओं का आधार क्या है?
स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में काम करने वालों की अनदेखी, सीधे-सीधे जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। सरकार को यह समझना होगा कि गारंटी पोस्टरों से नहीं, बल्कि समय पर वेतन और सम्मान से साबित होती है।
अब निगाहें सरकार पर हैं,क्या मितानिनों की आवाज़ सुनी जाएगी या फिर “तकनीकी कारणों” की ढाल में यह मुद्दा भी दबा दिया जाएगा?

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

