छत्तीसगढ़ । विशेष रिपोर्ट_
छत्तीसगढ़ की धरती पर होली सिर्फ रंगों का पर्व नहीं है, यह हमारी संस्कृति, परंपरा और लोकजीवन की धड़कन है। गांव-गांव में ढोल-नगाड़ों की थाप, फाग गीतों की गूंज और चौपालों की रौनक इस बात का सबूत है कि यह त्योहार यहां की आत्मा में बसता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या आज की होली उसी उल्लास और सुरक्षा के साथ मनाई जा रही है,जैसी होनी चाहिए?
रायपुर से लेकर बिलासपुर, दुर्ग से लेकर बस्तर तक हर साल प्रशासन बड़े-बड़े दावे करता है,“शांति व्यवस्था चाक-चौबंद है”, “कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है।” लेकिन जमीनी हकीकत क्या है?
शराब की अवैध बिक्री, नशे में हुड़दंग, सड़क हादसे और कानून का खुलेआम मजाक,क्या यही है त्योहार की तैयारी?
होली का मतलब है भाईचारा, लेकिन कुछ जगहों पर यह जबरन रंग लगाने, महिलाओं के साथ अभद्रता और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का बहाना बन जाता है। सवाल सीधा है,क्या प्रशासन सिर्फ प्रेस नोट जारी करने तक सीमित रहेगा या सख्त कार्रवाई भी करेगा?
छत्तीसगढ़ की होली की असली पहचान है लोकसंस्कृति – पंथी नृत्य, करमा गीत, और ग्रामीण अंचलों में पारंपरिक फाग। लेकिन आज इन सांस्कृतिक आयोजनों को संरक्षण देने की बजाय सत्ता और राजनीति अपने-अपने मंच सजाने में लगी दिखाई देती है।
नेताओं की तस्वीरों वाले बैनर ज्यादा दिखते हैं, लोक कलाकारों को मंच कम मिलता है।
और महंगाई का मुद्दा? रंग, गुलाल, मिठाई, यहां तक कि लकड़ी और पूजा सामग्री तक के दाम आसमान छू रहे हैं। आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।त्योहार की खुशी तब फीकी पड़ जाती है जब बाजार में हर चीज पर “महंगाई का रंग” चढ़ा हो।
यह वक्त है सवाल पूछने का
क्या होली सिर्फ दिखावे और राजनीति का मंच बनकर रह जाएगी?
क्या आम जनता की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता मिलेगी?
क्या लोकसंस्कृति को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?
छत्तीसगढ़ की होली को हुड़दंग नहीं, उत्सव बनाना होगा। प्रशासन को सख्ती दिखानी होगी, समाज को जिम्मेदारी निभानी होगी और राजनीति को त्योहार से दूरी बनाकर लोकसंस्कृति को आगे बढ़ाने देना होगा।
रंगों का यह पर्व हमें जोड़ने के लिए है, तोड़ने के लिए नहीं।
अगर व्यवस्था चूकती है, तो सवाल उठेंगे,और उठने भी चाहिए।
क्योंकि होली सिर्फ रंगों का खेल नहीं, समाज के चरित्र का आईना भी है।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

