Vinod Netam

(Chhattisgarh junction)पहला विश्वयुद्ध सीमाओ पर लड़ा गया। ट्रेंच में, बंदूकों और शेल से। दूसरा विश्वयुद्ध शहरों के अंदर आ गया। लोगो ने अपने चौक चौराहों पर विदेशी केवल सीमाओं या मोर्चों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शहरों और आम लोगों के जीवन तक पहुँच गया।लोगों ने अपने ही चौक-चौराहों पर विदेशी सैनिकों की मौजूदगी देखी, और स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि युद्ध राजधानी तक पहुँच गया।
और जब राजधानी तक पंहुचा
तो युद्ध खत्म हो गया।
अब युद्ध राजधानी से ही शुरू होता है।
प्रिसिजन बॉम्बिंग, जीपीएस, और ड्रोन ने इंडिविजुअल किलिंग को महज वीडियो गेम बना दिया है।

शत्रु किसी देश की जनता नही होती, राजनेता होते हैं। तमाम टेक्नोलॉजी के बावजूद यह मोरल बंधन बना हुआ था, कि केवल सैनिक ठिकाने पर निशाना लगाया जाएगा।
नेता बचे रहते थे। इस युद्ध ने सिविलियन और राजनीतिक ठिकानों पर भी प्रिसिजन अटैक की परिपाटी बिठाई है।
आने वाले दौर में युद्ध लड़ने वाले हर नेता पर, हत्या का खतरा बना रहेगा। और सिर्फ खामनेई के लोग कंप्रोजमाइज्ड थे, बाकी के नही होंगे।ऐसा सोचना खामख्याली है।
हर देश मे, हर राजधानी के, हर नेता के गिर्द कंप्रोजमाइज्ड लोग रहते है। ये उन्ही के विश्वासपात्र लोग होते हैं। और जिन्हें नेता के मरने में लाभ मिलना है।
तो आने वाले दौर के हर युद्ध मे राजधानी पर बम गिराकर “सांप का फन कुचलने” के जुमला सुना दिया जायेगा। दूसरा करे, उसके पहले खुद करने की कोशिश रहेगी
नेगोशियेशन्स का अंडर टोन कुछ यह होगा
साइन कर, वरना तुझे मरवा दूंगा।
युद्ध, बहादुरी और शौर्य का मसला कम, विपक्षी नेता की हत्या का कम्पटीशन बनकर रह जाना है। इसे हम सिविलाइज्ड वर्ल्ड ऑर्डर कहते रहेंगे।
गुंडे, मवाली, माफिया और व्यापारी को नेता बनाने का अंजाम यही है।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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