गब्बर सिंह की कलम से… ससूरा ई का भईल
(Chhattisgarh junction) बिहार की राजनीति एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है जहाँ सवाल ज्यादा हैं और जवाब कम। चुनाव के समय विपक्ष लगातार यह आरोप लगा रहा था कि नीतिश कुमार को चुनाव के बाद भाजपा धोखा दे देगी और उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटा दिया जाएगा।
लेकिन उस समय नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार पूरे आत्मविश्वास के साथ कहते नजर आए थे।
“अमित अंकल ने कहा है कि पिताजी ही मुख्यमंत्री रहेंगे।”
यहाँ “अमित अंकल” से उनका इशारा सीधे तौर पर अमित शाह की तरफ था।
अब बिहार की सियासत में फिर वही सवाल गूंज रहा है।
क्या वह भरोसा अब भी कायम है, या राजनीतिक पटकथा बदल चुकी है?
सियासी गलियारों में नया फार्मूला
राजनीतिक जानकारों का दावा है कि सत्ता के गलियारों में एक नया समीकरण तैयार किया जा रहा है। चर्चा यह है कि नीतीश कुमार को राज्यसभा के रास्ते किसी बड़े संवैधानिक पद की ओर भेजने की रणनीति बनाई जा रही है।
यदि ऐसा होता है तो बिहार में सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।
भाजपा का मुख्यमंत्री
और जनता दल (United) से दो उपमुख्यमंत्री
यानी “सुशासन बाबू” के नाम से मशहूर नीतीश कुमार शायद अब बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि किसी नई राजनीतिक भूमिका में दिखाई दें।
दुनिया में जंग का जहन्नुम
इधर दुनिया का हाल भी कम भयावह नहीं है। ईरान इजराइल और यूनाइटेड के बीच छिड़े तनाव और युद्ध जैसे हालात ने पूरे मध्य-पूर्व को बारूद के ढेर पर बैठा दिया है। बच्चों के स्कूल हवाई हमले के जरिये गिराये जा रहे है। शांति सेना के तौर पर शामिल जहाजो पर सवार निहत्थे भारत के ईरानी मेहमानों को समुन्दर में डूबोया जा रहा है। इस तमाम मारकांट को दुनिया की जनता अपनी खुली आँखों से जहन्नुम जैसा मंजर के रूप में देख रही है। हालांकि युद्ध से पहले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजराइल का दौरा करने गए थे और उनके वापस लौटने के कुछ घंटो के बाद में ईरान पर हमला शुरू हो गया था।मिसाइलें, बमबारी, सैनिक अड्डों से उठता धुआँ और अनिश्चितता का साया।
इस युद्ध का असर वैश्विक व्यापार पर भी पड़ रहा है। समुद्री मार्ग बाधित होने से कई देशों के मालवाहक जहाज रास्तों में फंसे बताए जा रहे हैं और अरबों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
“देशी नीरो” की खामोशी?
आलोचक तंज कसते हुए कहते हैं कि जब दुनिया के सामने युद्ध और संकट का इतना बड़ा खतरा खड़ा है, तब भारत की सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग मानो खामोशी की बंसी बजा रहे हों।कहा जा रहा है कि जिस समय दुनिया जहन्नुम का मंजर देख रही है, उसी समय बिहार की सियासी जमीन पर बिना बादल के बरसात हो रही है।
यानी सत्ता के समीकरण अचानक बदलते नजर आ रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह खामोशी और सत्ता का यह खेल आगे चलकर देश की जमीनी हकीकत पर रहने वाली आम जनता के लिए भारी परिणाम लेकर आ सकता है।
आखिर सवाल वही…
अब फिर वही सवाल हवा में तैर रहा है।
क्या बिहार की सत्ता में बड़ा उलटफेर होने वाला है?
और अगर ऐसा होता है तो लोग फिर पूछेंगे।
“निशांत कुमार जी… आखिर अमित अंकल ने कहा क्या था?”

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

