विनोद नेताम (वरिष्ठ पत्रकार) छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ विशेष रिपोर्ट_
बधाई हो छत्तीसगढ़,आखिर हम कहीं तो नंबर वन आए।
भ्रष्टाचार और अपराध की दौड़ में आगे रहने के बाद अब जाम छलकाने की प्रतिस्पर्धा में भी हमने नया इतिहास रच दिया है।
होली के मौके पर 128 करोड़ रुपये की शराब की बिक्री यह कोई मामूली आंकड़ा नहीं, बल्कि उस “विकास मॉडल” का आईना है जिसे आज बड़े गर्व से प्रस्तुत किया जा रहा है। विकास की गंगा बहे या न बहे, मगर शराब की नदियां जरूर बह रही हैं।

छत्तीसगढ़ में नई आबकारी नीति 2025–26 लागू होने के बाद राज्य में शराब दुकानों की कुल संख्या लगभग 741 हो गई है।

यानी औसतन हर साल लगभग 5,900–6,000 करोड़ रुपये की शराब बिकती है।

इस “ऐतिहासिक उपलब्धि” के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा के साथ-साथ तथाकथित “सुपर सीएम” ओ पी चौधरी को विशेष धन्यवाद देना तो बनता ही है।
छत्तीसगढ़ को नंबर वन बनाने का आपका तरीका वाकई लाजवाब है।

सोचिए एक तरफ मंचों से नशाखोरी के खिलाफ बड़े-बड़े भाषण दिए जाते हैं, समाज को नशामुक्त बनाने के संकल्प दिलाए जाते हैं, धार्मिक मंचों से माला जप कराकर लोगों को नशा छोड़ने की सीख दी जाती है।
और दूसरी तरफ उसी समाज के सामने शराब की बिक्री के नए-नए रिकॉर्ड बनते जाते हैं।
यह दोहरा चरित्र आखिर किसे धोखा दे रहा है?
जब सत्ता और व्यवस्था खुद नशे के कारोबार से खजाना भरने लगे, तब समाज को संयम और संस्कार का पाठ पढ़ाना क्या सिर्फ दिखावा नहीं रह जाता?
कहा जाता है, “नशा, नाश की जड़ है।”
लेकिन अगर व्यवस्था ही नशे को बढ़ावा देने लगे, तो शायद हमें यह नारा बदलना पड़ेगा।शायद अब नया नारा यही होगा
“जीना है… तो पीना है!”
और अगर यही विकास का मॉडल है, तो सच में छत्तीसगढ़ बहुत तेजी से “नंबर वन” बनने की राह पर है।बस दिशा थोड़ी अलग है।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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