Vinod Netam

विशेष रिपोर्ट_
देश में महंगाई अब सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं रही,अब यह सीधे आम आदमी की रसोई में घुस चुकी है।घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में 60 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है।

अब 7 मार्च से गैस सिलेंडर 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये में मिलेगा। यानी अब दाल-रोटी पकाने से पहले जेब का हिसाब लगाना पड़ेगा।
कभी बड़े-बड़े भाषणों में कहा गया था कि गरीब की रसोई में धुआं खत्म होगा और गैस चूल्हा जलेगा। सच भी है, गैस चूल्हा तो पहुंच गया, लेकिन सिलेंडर इतना महंगा हो गया कि कई घरों में अब भी चूल्हा ठंडा पड़ा है। सरकार की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने सिलेंडर तो दे दिया, लेकिन उसे भरवाने का खर्च अब गरीब के लिए किसी लग्ज़री से कम नहीं रहा।
हालात यह हैं कि सब्जी महंगी, तेल महंगा, दाल महंगी और अब गैस भी महंगी। यानी रसोई में अगर कुछ सस्ता बचा है तो वह सिर्फ सरकार के वादे और भाषण ही हैं। जनता पूछ रही है कि आखिर हर महीने कीमत बढ़ाने की यह नई परंपरा कब तक चलेगी?
व्यंग्य यह है कि देश में विकास की बड़ी-बड़ी कहानियां सुनाई जाती हैं, लेकिन आम आदमी की थाली हर महीने छोटी होती जा रही है। गैस सिलेंडर अब ऐसा मेहमान बन गया है जिसे घर बुलाने से पहले दस बार सोचना पड़ता है।
कुल मिलाकर हालात यह हैं कि देश में विकास का इंजन भले तेज चल रहा हो, लेकिन आम आदमी की रसोई का चूल्हा धीरे-धीरे ठंडा पड़ता जा रहा है।
खाना पकाना भी हुआ महंगा। रसोई गैस के दाम में फिर बढ़ोतरी, जनता की जेब पर एक और वार।
लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। पहले ही आटा, दाल, तेल और सब्जियों के दाम लोगों की कमर तोड़ रहे हैं, ऐसे में गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ना सीधे गरीब और मध्यम वर्ग की थाली पर हमला माना जा रहा है।
सरकार की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के जरिए देश के करोड़ों घरों तक रसोई गैस जरूर पहुंची, लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि जब गैस सिलेंडर लगातार महंगा होता जा रहा है तो गरीब परिवार उसे भरवाए कैसे?

कई जगहों पर हालत यह है कि उज्ज्वला के सिलेंडर रसोई में पड़े हैं, लेकिन उन्हें भरवाने के पैसे नहीं हैं।
दूसरी तरफ आम लोगों का यह भी आरोप है कि रसोई गैस पर मिलने वाली सब्सिडी का अब कोई स्पष्ट पता नहीं है। कभी सब्सिडी आती है, कभी नहीं आती, और अगर आती भी है तो इतनी कम कि उससे सिलेंडर की कीमत में कोई खास राहत नहीं मिलती।
आलोचकों का कहना है कि एक ओर सरकार बड़े उद्योगपतियों को राहत देने में व्यस्त दिखाई देती है, तो दूसरी ओर आम जनता हर महीने बढ़ती कीमतों के जरिए अपनी जेब ढीली करने को मजबूर है। जब देश में बेरोजगारी और महंगाई दोनों चरम पर हों, तब रसोई गैस की कीमत बढ़ना सीधे-सीधे जनता की परेशानियों को और बढ़ाने वाला कदम बन जाता है।
आज हालात यह हैं कि जिस रसोई गैस को कभी स्वच्छ और सुलभ ऊर्जा का प्रतीक बताया गया था, वही अब आम आदमी की रसोई पर आर्थिक बोझ बनती जा रही है। सवाल यह है कि आखिर महंगाई की इस आग में झुलस रही जनता को राहत कब मिलेगी?

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed