विनोद नेताम
छत्तीसगढ़/बालोद/विशेष रिपोर्ट_
बालोद कलेक्टर कार्यालय के बाहर हुई एक घटना ने उस सच्चाई को नंगा कर दिया है, जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। एक कलमधारी के साथ सार्वजनिक रूप से अभद्रता और थप्पड़बाज़ी,ये सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि उस सोच पर हमला है जो सच लिखने की हिम्मत रखती है।
अमृतकाल के दावों के बीच अगर पत्रकारों को ही चुप कराने के लिए हाथ उठने लगें, तो यह सवाल उठना लाजिमी है,क्या सच अब इतना असहज हो गया है कि उसे दबाने के लिए हिंसा का सहारा लेना पड़ रहा है?
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चुभता पहलू है,खामोशी।
वही खामोशी, जो उन लोगों के बीच पसरी हुई है जो खुद को पत्रकारिता का ठेकेदार बताते हैं। जब एक कलम पर हमला होता है, तो पूरी बिरादरी को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। मगर यहां तो सन्नाटा है,जैसे किसी ने सच्चाई को ही बंद कमरे में कैद कर दिया हो।
गुरूर विकासखंड के नगर पंचायत पलारी क्षेत्र का नाम पहले भी विवादों में रहा है। आरोप लगते रहे हैं कि कुछ लोग पत्रकारिता का चोला ओढ़कर अपने निजी हित साधते हैं, और आम जनता को भ्रमित करते हैं। ऐसे तत्व न सिर्फ समाज का नुकसान करते हैं, बल्कि असली पत्रकारों की साख को भी खोखला कर देते हैं।
आज जरूरत है साफ-साफ लकीर खींचने की
एक तरफ वे लोग, जो कलम को सच की ताकत मानते हैं।
और दूसरी तरफ वे, जो इसे ढाल बनाकर अपने मतलब निकालते हैं।
प्रशासन को चाहिए कि इस घटना की निष्पक्ष और त्वरित जांच करे। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो, ताकि यह संदेश साफ जाए कि कलम को डराने की हर कोशिश नाकाम होगी। साथ ही, पत्रकारिता के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े पर भी लगाम कसना अब वक्त की मांग बन चुका है।
क्योंकि याद रखिए।
जब कलम खामोश होती है, तो अन्याय बोलने लगता है।
और जब कलम पर हमला होता है, तो लोकतंत्र खुद लहूलुहान हो जाता है।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

