डाक्टर ऊबड़ी वाला कंही नगर पंचायत पलारी में भाजपा को पलटी ना करवा दे।

विनोद नेताम

छत्तीसगढ़/बालोद/पलारी/ विशेष रिपोर्ट_

जानकारी ही सावधानी है और सावधानी ही बचाव…
देश की सियासी सरजमीं पर एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी चुनाव दर चुनाव लगातार मजबूत प्रदर्शन करते हुए जीत का परचम लहरा रही है, वहीं दूसरी ओर पार्टी से जुड़े कुछ छोटे-बड़े नेताओं की करतूतें समय-समय पर सियासी गलियारों में सवालों का तूफान खड़ा करती नजर आती हैं।सत्ता की बुलंदी पर बैठी पार्टी के लिए सबसे बड़ा खतरा हमेशा विपक्ष नहीं होता, कई बार अपने ही कुनबे के भीतर बैठे वे चेहरे होते हैं, जिनकी हरकतें जनता के बीच पार्टी की छवि पर दाग लगाने का काम करती हैं। जब कोई नेता अपने पद, प्रभाव और राजनीतिक पहचान का इस्तेमाल जनसेवा के बजाय निजी स्वार्थ, अहंकार और विवादों में उलझाने लगे, तब उसकी चोट सिर्फ उसकी व्यक्तिगत छवि तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसकी आंच पूरे संगठन तक पहुंचती है। यही कारण है कि कई बार कुछ नेताओं के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार और विवादित बयानों से भाजपा को राजनीतिक आलोचना और किरकिरी का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद एक कड़वा लेकिन साफ सच यह भी है कि हर चुनाव में भाजपा का लगातार मजबूत प्रदर्शन यह दिखाता है कि पार्टी की नीतियों, संगठन क्षमता और नेतृत्व के प्रति देश के बड़े वर्ग का भरोसा अब भी कायम है। जनता बार-बार वोट देकर यह संकेत देती रही है कि राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की पकड़ और राजनीतिक प्रभाव मजबूत बना हुआ है। लेकिन असली सवाल यही है क्या एक अनुशासित और मजबूत राजनीतिक दल के माथे पर ऐसे नेताओं का बोझ शोभा देता है, जो अपने आचरण से संगठन की साख पर चोट पहुंचाते हैं? क्या पार्टी के भीतर बैठे ऐसे विवादित चेहरों पर सख्त जवाबदेही तय होना जरूरी नहीं? क्योंकि चुनाव जीतना ताकत की पहचान हो सकता है, लेकिन चरित्र, अनुशासन और जवाबदेही ही किसी दल की असली राजनीतिक प्रतिष्ठा तय करते हैं। सियासत में जीत का शोर बहुत दूर तक सुनाई देता है, मगर जनता सब देखती है कौन पार्टी को ऊंचाई दे रहा है और कौन भीतर से उसकी साख को खोखला कर रहा है। यही सबसे बड़ा सवाल है, और जवाब भी।

दरअसल भाजपा की साख इन दिनो बालोद जिले के संजारी बालोद विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत राजनीतिक रणभूमि के रूप में मशहूर गुरुर विकासखंड क्षेत्र नये नवेले बनाई गई नगर पंचायत पलारी में गिरती हुई दिखाई दे रही है और इसका एक बड़ा कारण यह है कि अपनी घटिया करतूतो की वजह से आए दिन पार्टी का नाम खराब करने वाले एक नेता के चुनाव प्रचार में शामिल होना।

बता दे की नगर पंचायत पलारी अब से कुछ दिन पहले ग्राम पंचायत पलारी के तौर पर जाना जाता था और यह वही पलारी है जहां के किसानों को अन्नदाता माटी पुत्र भगवानों को इस क्षेत्र में रहने वाले धान फर्जी कोचिंयाओं ने लूट लूट कर उनके भरोसा का दम तोड़ा है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी नगरी निकाय चुनाव जो की नगर पंचायत पलारी में कुछ दिन बाद में होने वाला है उक्त चुनाव प्रचार हेतु ग्राम पंचायत मोहारा के एक भारतीय जनता पार्टी के नेता को शामिल कर रहे हैं जबकि उनके नाम पर किसानों के साथ धोखाधड़ी करने का खुला आरोप है।इसके अलावा इस नेता पर अपने ही गांव के सरकारी स्कूल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के अव्हान के अनुसार एक वृक्ष माँ के नाम पर रोपित की गई सैकड़ों हरे वृक्षों को तहस नहस करने का भी आरोप लगा है तथा ग्राम मोहारा के भीतर मौजूद आदीवासी महिला सरपंच को काम नहीं करने देने की बात भी निकल कर सामने आई है।

ऐसे में इस नेता को भारतीय जनता पार्टी नगर पंचायत चुनाव प्रचार में घर घर वोट मांगने हेतू भिड़ा कर क्या साबित करना चाहता है यह अबतक समझ से परे नजर आ रहा है।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *