बालोद/गुरुर :- प्रवासी पक्षियां हर साल ठंड के मौसम में अन्य देशों से हमारे भारत देश के विभिन्न राज्यों के कोने कोने में अपने अनुकूल जगह का चयन कर बसेरा बसाते है।क्योंकि ये पक्षियां एक विशेष मौसम में अपने प्रजनन और भोजन की तलाश में ये अपने मूल निवास से कुछ दिनों के लिए हमारे भारत देश की कई राज्यों में इन्हें देखा जा सकता है।

ये पक्षियां अक्सर समुद्र दलदली तटीय इलाकों में निवास करते है। अक्सर ये पक्षियां ठंड के मौसम में अपना स्थान बदल लेते है।
परिवार की सदस्यों की जनसंख्या में वृद्धि और भोजन पानी के लिए यह अपना अनुकूल स्थान पर कुछ महीनों तक रुके रहते है।फिर वापस अपने मूल स्थान पर लौट जाते है।
प्रवासी पक्षी वे पक्षी होते हैं जो भोजन, प्रजनन या मौसम बदलने के कारण हर साल लंबी दूरी तय करके एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं और फिर वापस अपने मूल स्थान पर लौट आते हैं, जो कि प्रकृति का अद्भुत नजारा है और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है,जैसे साइबेरियन क्रेन और रोजी पैस्टर,जो भारत में सर्दियों में आते हैं।
ये पक्षी सूर्य, तारों और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करके नेविगेट करते हैं, लेकिन प्रदूषण और आवासों के विनाश के कारण इनकी संख्या घट रही है। जंगलों की कटाई,शोर शराबा,बढ़ते प्रदूषण
बढ़ते आबादी ऐसे बहुत सारे कारणों की वजह से ही इनकी संख्याओं में लगातार कमी देखने को मिल रही है।जिसे सुरक्षित करना सरकार और नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी होना चाहिए।

यह प्रवासी पक्षियां अभी गुरुर विकासखंड के ग्राम पंचायत सुर्रा के तालाब में अपना ठिकाना चुना हुआ है।
आने जाने वाले लोगों के लिए इन पक्षियों का मनोरम दृश्य काफी कौतूहल का विषय बना हुआ।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

