सुनियोजित प्लानिंग के तहत 900 कट्टा धान लेकर गायब हुई ट्रक लगभग 300 से ज्यादा कट्टा पार। प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी में हिस्सेदारी की आ रही महक।

विनोद नेताम

छत्तीसगढ़/ बालोद/गुरुर/ विशेष रिपोर्ट_
बालोद जिले के गुरूर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बड़भूम के जंगलों के बीचों बीच लावारिस हालत में मिली धान से लबालब भरा हुआ ट्रक।इससे पहले ग्राम पंचायत बड़भूम के पंचायत सदस्यों ने पुलिस महकमा को दिया सूचना।बावजूद इसके गुरूर विकासखंड क्षेत्र के ग्राम बड़भूम के दमकशा चौराहे पर पूरे दीन लावरिस हालत में मिला धान से भरा हुआ लबालब ट्रक…

बालोद जिले में धान खरीदी परिवहन व्यवस्था की पोल खुल गई। गुंडरदेही के कोड़ेवा केंद्र से 900 बोरी धान लादकर निकला ट्रक चार दिनों तक गायब रहा, जबकि जीपीएस निगरानी अनिवार्य है। जंगल में खड़ा मिला यह ट्रक न केवल विभागीय नाकामी, बल्कि ठेकेदारों के गठजोड़ को भी उजागर करता है। किसानों का भरोसा तोड़ने वाली यह घटना जांच का दावा कर रही है।
ट्रक लापता, व्यवस्था सोई हुई
13 जनवरी को कोड़ेवा धान खरीदी केंद्र से दमन ट्रांसपोर्ट का ट्रक 900 बोरी धान लेकर रवाना हुआ। शासन के स्पष्ट निर्देश के बावजूद जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम निष्क्रिय रहा। चार दिन तक कोई सुराग न मिलने के बावजूद न ठेकेदार ने शिकायत की,न विभाग ने अलर्ट जारी किया। बालोद-कांकेर सीमा के बढ़भूम दमकसा गांव के पास घने जंगल में ग्रामीणों ने सड़क किनारे लावारिस ट्रक देखा। देर रात प्रशासनिक दल पहुंचा, लेकिन तब तक भारी जनाक्रोश फैल चुका था।

ट्रांसपोर्टर का पुराना इतिहास
पिछले चार-पांच वर्षों से बालोद में धान परिवहन का जिम्मा दमन ट्रांसपोर्ट पर है। फुंडा, धोबनपुरी, जगतरा केंद्रों में धान की कमी के पुराने मामले इसी ठेकेदार से जुड़े हैं। सूत्र बताते हैं कि हमाली, भूसा ढुलाई जैसे कार्यों में फर्म का नाम बदलकर एक ही समूह सक्रिय है। ठेकेदारों की विभाग में गहरी पैठ होने से जांच नाममात्र की रहती है। राइस मिल कारोबारियों से संबंध भी जांच का विषय बने हैं।
जीपीएस व्यवस्था का पर्दाफाश
शासन द्वारा अनिवार्य जीपीएस निगरानी व्यवस्था धान परिवहन में नाकाम साबित हुई। ट्रक के गायब होने पर न तो रीयल-टाइम अलर्ट सक्रिय हुआ, न विभागीय नियंत्रण कक्ष ने संज्ञान लिया। ग्रामीणों के बिना यह मामला दबा रहता। जिला विपणन अधिकारी टिकेंद्र राठौर ने जांच का भरोसा दिया, किंतु जीपीएस फेल्योर और लापरवाही पर स्पष्टता नहीं दी।
जनता का गुस्सा उफान पर
ग्रामीणों ने सवाल उठाए कि आधुनिक निगरानी के जमाने में भरा-पूरा ट्रक कैसे चार दिन गायब रह सकता है? धान खरीदी किसानों की कमाई का मामला है, फिर भी व्यवस्था सो रही। स्थानीय स्तर पर ठेकेदारों-अधिकारियों के गठजोड़ की चर्चा जोरों पर है। लोग मांग कर रहे हैं कि न केवल लापता धान का हिसाब हो, बल्कि जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई भी सुनिश्चित हो।
व्यवस्था पर सवालों की बौछार
यह घटना एक ट्रक का मामला नहीं,बल्कि धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया पर सवाल है। ठेकेदार चयन, जीपीएस कार्यान्वयन, निगरानी तंत्र सब कुछ जांच के घेरे में है। क्या दोषी ठेकेदार का लाइसेंस रद्द होगा? संबंधित अधिकारियों पर विभागीय कार्यवाही कब होगी? किसानों का धान सुरक्षित रहे,इसके लिए क्या कड़े कदम उठेंगे?

विपणन विभाग को पारदर्शी जांच रिपोर्ट जनता के सामने लानी होगी।
यह कांड छत्तीसगढ़ धान खरीदी की विश्वसनीयता को चुनौती देता है।

यदि ऐसी लापरवाही पर तत्काल चेतावनी नहीं दी गई, तो भविष्य में बड़े घोटाले हो सकते हैं। किसान भाईयों का पसीना बेकार न जाए, इसके लिए शासन को कठोर रुख अपनाना होगा।

वहीं कांग्रेस कार्यकर्ता गुरुर वन परिक्षेत्र विधायक प्रतिनिधि तुलेश सिन्हा

इस मामले की निष्पक्ष जाँच कर सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही को लेकर रात में डटे रहे। अगर इस मामले में संलिप्त लोगों के ऊपर कार्यवाही नहीं किया गया। तो उग्र आंदोलन की भी चेतावनी दी है

बड़भूम सरपंच पति संदीप यादव,शिवम कुरैटी,एवं गांव के वरिष्ठ नागरिक इस तरह की घटना को अंजाम देने वालों पर तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

कार्यवाही में जिला सहकारी विपणन अधिकारियों के साथ गुरुर तहसीलदार हनुमंत श्याम,उपपंजीयक राजेंद्र राठिया,खाद्य निरीक्षक नरेश पिपरे एवं विभागीय अमला अधिकारी कर्मचारियों की टीम के साथ गुरुर पुलिस पहुंचे हुये थे।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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