बालोद में मनरेगा को लेकर कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन।
प्रदेश अध्यक्ष दिपक बैज हुए शामिल।

विनोद नेताम ( वरिष्ठ पत्रकार)
छत्तीसगढ़/बालोद/गुरुर/विशेष रिपोर्ट _
छत्तीसगढ़ के मुखिया विष्णुदेव साय सरकार की निती और नियत के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष दीपक बैज सहित संजारी बालोद विधायक संगीता सिन्हा की बेबाक सवाल।
किसानों के द्वारा आये दिन हो रही बवाल के बीचोबिच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने धान खरीदी के कार्य को 4 और 6 तक आगे बढ़ाने का फैसला लिया है।

इस फैसले के पीछे सरकार का तर्क यह है कि प्रदेश के भीतर में मौजूद रहने वाले बचे कुचे अन्नदाता माटीपुत्र किसान जो कि धान बेचने में असफल साबित हुये वे सभी किसान इन दो दिनों में अपना धान बेंच पायेगें,लेकिन कांग्रेस पार्टी का कहना है कि भारतीय सरकार किसानों प्रति जवाबदेह नहीं है बल्कि छत्तीसगढ़ सरकार नियत गौतम अडानी को लेकर सटिक और बहुत सही है।
बालोद कलेक्ट्रेट के बाहर कांग्रेसियों का जबर्दस्त प्रदर्शन
भाजपा के केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा को बंद करने एवं रोजगार गारंटी को समाप्त करने के निर्णय और किसानों का धान नहीं बिकने के चलते कांग्रेस कमेटी बालोद द्वारा बिते कल कलेक्टर आफिस बालोद का घेराव किया गया था।कांग्रेस कमेटी बालोद के तत्वाधान में हुये कलेक्टर आफिस के घेराव कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज भी शामिल हुए थे।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष दीपक बैज

इस दौरान छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने बताया कि एक दिवसीय कलेक्टर घेराव का कार्यक्रम मनरेगा बचाने के लिये और किसानों का धान खरीदी को लेकर किया गया था।
कांग्रेस पार्टी के द्वारा पूरे प्रदेश में इस तरह का प्रदर्शन मनरेगा बचाने के लिए एवं हमारे अन्नदाता माटीपुत्र किसानों के हक और अधिकार को वापस दिलवाने हेतू चलाया जा है।
एक तरफ जहां सरकार मनरेगा को खतम कर रही है जिससे बेरोजगारी बढ़ेगी लोगों का पलायन बढ़ेगा सरकार को मनरेगा का वापस लाना चाहिए वंही दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ सरकार किसानों का बचा हुआ धान सरकार खरीदी करे ताकि किसानों को कोई दिक्कत न हो।
बता दे कि छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा इस साल धान खरीदी के कार्य में भंयकर लापरवाही बरती गई है जिसके कई किसानों को खून का आंसू रोना पडा है।

संजारी बालोद विधायक संगीता सिन्हा

वंही मजदूरों की हालत खेती किसानी के दीन बादर खत्म होने के बाद में फुर्सत वाली सिजन बन कर रह गई है।
बताया जाता है कि मनरेगा में हुई बदलाव के चलते ग्रामीण अंचल के भीतर में रहने वाले आम मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है।
बालोद जिला के गुरूर विकासखंड क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत गंगोरीपार के आश्रित ग्राम तितुरगहन के भीतर कई मजदूर है जिन्हे मनरेगा जैसी ग्रामीण रोजगार के भीतर में काम करने से रोका जा रहा है।वंही धान खरीदी की मियाद दो दीन तक के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के मुखिया ने बढ़ा तो दी है,लेकिन क्या दो दीन के भीतर में बांकी धान खरीदी का कार्य पुरा हो पायेगा यह एक शोध का विषय है।
चूंकि छत्तीसगढ़ महतारी के अन्नदाता माटीपुत्र किसानों को इससे पहले इस तरह की कठिनाइयों से जूझना नहीं पड़ा है।

ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार के मुखिया जी के द्वारा दो दिन तक के बड़ाई मिंयाद,यह दर्शाता है कि सरकार ने असल मायने में धान खरीदी के कार्य को लेकर लापरवाही बरती है और यह बात सवा आना सत्य है।

सनद रहे समस्त चराचर जगत के भीतर में मौजूद अन्नदाता किसानों की असल पहचान यदि सही मायनो में देखा जाय तो अन्नदाता भगवान के रूप मे सदियों से होती हुई चली आ रही है और भारत की पहचान तो वैसे भी बरसो से खेत खलिहान और किसान के रूप में विश्व विख्यात है।

किंन्तु हैरत की बात यह है कि अमृतकाल के इस दौर में अब देश भीतर मौजूद अन्नदाता किसानों का औकात महज दो कौड़ी की बन चुकी है और रही बात बनाने वाला कोई नहीं बल्कि देश की सत्ता पर काबिज रहने वाला सरकार है।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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