विनोद नेताम (वरिष्ठ पत्रकार)
छत्तीसगढ़/बालोद/विशेष रिपोर्ट _
किसानों के द्वारा आये दिन हो रही बवाल के बीचों बिच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने धान खरीदी के कार्य को 5 और 6 तक आगे बढ़ाने का फैसला लिया है।
इस फैसले के पीछे सरकार का तर्क यह है कि प्रदेश के भीतर धान बेचने में असफल साबित हुये किसान इन दो दिनों में अपना धान बेच पाएंगे।

मतलब स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ के भीतर में उन्नत खेती के साथ वन्यसंपदा की भरमार है।
ऐसे में छत्तीसगढ़ राज्य की पहचान यंहा पर स्थित घने जंगलो को भी लेकर होती हुई चली आ रही है।
इसी के साथ जंगल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक सभ्यता और विरासत की अटूट पहचान के तौर भी माना जाता रहा है।
किन्तु अमृतकाल रूपी इस कलयुग के भीतर यह चिंतन करने वाली बात है कि भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार के छत्तीसगढ़ की सत्ता पर काबिज रहते हुये क्या छत्तीसगढ़ प्रदेश के जंगल और कृषि ऊपजाऊ सरजंमी सचमुच सुरक्षित है?
चूंकि छत्तीसगढ़ राज्य के भीतर में भी जनसंख्या का दबाव अन्य बांकी जगहों की तरह ही बेतहाशा तेजगति से बढ़ रहा है। इस बीच बढ़ती हुई जनसंख्या का भार एक तरह से धरती ही संम्हाली है और ऊपर से वही धरती उन्हें भोजन के साथ रोजगार भी मुहैया कराती है।
ऐसे में जरा में जरा सोचिये क्या भाजपा की सरकार समय की मार से छत्तीसगढ़ को उबार पाने में सफल हो पायेगी यह एक बड़ा सवाल है।

घटती हुई खेती लायक जमीने और अंधाधुंध तरीके से कटते हुए जंगल,जो कि राज्य के भीतर में सांस्कृतिक और भौगोलिक सभ्यता की पहचान की तौर पर जाना व पहचाना जाता रहा है।
ज्ञात हो कि प्रदेश के भीतर मौजूद रहने वाले तीन करोड़ छत्तीसगढ़ महतारी के करिया बेटा बेटियों की आय का जरिया वन संपदा और कृषि उपज है। ऐसे में भाजपा की डबल इंजन सरकार इन दोनो जरिया को उबारने के लिए कम और इन्हे बर्बादी के मुहाने पर खडा करने वाले उत्पाद पर अधिक जोर दे रही है,जो कि एक बड़ा चिंता का कारण बन रहा है।
गौरतलब हो कि देश के भीतर मौजूद केंन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार स्वदेशी अपनाओ का नारा बुंलद करते हुए देशी उत्पाद पर जोर देने की बात कहते हुये नजर आते है।
लेकिन जरा सोचिये छत्तीसगढ़ के जंगलों के बीच में रहने वाले आदिवासियों के लिये वन संपदा के अलावा देशी उत्पाद क्या हो सकता है?
जब एक तरफ प्रदेश के जंगलो को खनिज दोहन करने के नाम पर आये दिन उजाड़ा जा रहा है, तब देशी उत्पाद जंगलों के बीच में रहने वाले लोगों के पास कहां से उपलब्ध हो पायेगा यह भी एक बड़ा सवाल है।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

