विनोद नेताम (वरिष्ठ पत्रकार)
नई दिल्ली । छत्तीसगढ़ । विशेष रिपोर्ट _
टालमटोल और गोल मटोल जवाब के साथ सदन से भाग खड़े हो जाना यह एक बेहतरीन और जवाबदेह सरकार की कार्यप्रणाली कतई नहीं माना जा सकता है,अतः देश के नागरिक क्या अब यह समझना शुरू कर दे कि गोरे अंग्रेजो की गुलामी के बाद मिली हुई आजादी को एक बार फिर काले अंग्रेजो ने अमेरिका के हाथों नीलाम कर दिया है?
आखिरकार किस हैसियत के बलबूते अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार भारत को लेकर बार बार अनाप शनाप मूंह चला रहा है? क्यों एक केन्द्रीय मंत्री हरदिप पुरी का नाम अमेरिका के एक खूंखार अपराधी के साथ जोड़ कर लिया जा रहा है?

ऐसे अनगिनत कई सवालों पर सड़क से लेकर संसद के भीतर में बवाल देखा गया है और अमेरिका और भारत के रिश्तों को लेकर तरह तरह के सवाल इस बख्त उठाये जा रहे है।
बावजूद इसके सरकार के पास कोई माकूल जवाब नहीं है जिससे देश के नागरिक संतुष्ट हो सके। ऐसे में आगे आने वाले दिनों के भीतर में देश के अंदर सियासी घमासान मचनें का कयास लगाया जा रहा है।
“अमेरिका बहुत अमीर है”
औरअमरीका की सेना भी सबसे बड़ी है। इस बीच माना जाता है कि सेना और अमीरी का सीधा सीधा नाता होता है। ऐसे में जब गरीबी और मंदी आती है तो अमरीकी सेना किसी ना किसी देश पर हमला कर देती है।अमरीकी सरकार की नीतियों पर इन्ही अमीरों का कब्ज़ा है और ये अमीर तय करते हैं कि अब हमें कहाँ सेना भेजनी है। सेना अमीरों के मुनाफे के लिए युद्ध लड़ती है,जिसमे हजारों लोग मारे जाते हैं। हैरत की बात है अब भारत भी उसी रास्ते पर है।

इसलिए भारत के अमीरों पर जब गरीबी आती है,तब वो उड़ीसा , छत्तीसगढ़ ,झारखंड के जंगलों में खदानों और नदियों पर कब्ज़े के लिए भारत के अर्ध सैनिक बलों को भेज देते हैं। जैसे अमेरिकी सेना हमला करने के लिए उस देश के लोगों की आजादी और लोकतंत्र की रक्षा का बहाना बनाता है।

बिलकुल उसी तरह भारत की सरकारें देश की रक्षा,आंतरिक सुरक्षा का बहाना बनाती है।
बंदूक और अमीरी का बड़ा पुराना नाता ह
प्रकृति की सौगात सबके लिए है,
हवा सबके लिए है। पानी सबके लिए है।
ज़मीन भी सबके लिए है। हर बच्चा जो पैदा होता है,उसका प्रकृति की इन नेमतों पर बराबर का हक़ है,लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। दुनिया की सत्तर प्रतिशत दौलत एक प्रतिशत लोगों के हाथ में है। दौलत तब इकट्ठी होती है जब आपके साथ ताकत होती है।
आज के अमीर सरकार की ताकत के दम पर ही अमीर बनते हैं। टाटा अदाणी और अम्बानी को अगर सरकार मदद ना करे तो ये लोग देश के खनिजों और ज़मीनों पर कभी कब्ज़ा नहीं कर पायेंगे, और ना ही दौलत कमा पाएंगे। बताया जाता है कि इस दौरान टाटा अदाणी और अम्बानी को दौलतमन्द बनाने के लिए भारत की पुलिस, अर्ध सैनिक बल और सेना की मदद ली जाती है। जब गरीबों की जमीन छीननी हो या मजदूर पूरी मजदूरी मांगे तो उसको पीटने के लिए पुलिस की जरूरत पड़ती है। इन अमीरों को और भी अमीर बनाने के लिए पुलिस, अर्ध सैनिक बल और सेना गाँव वालों को,आदिवासियों को मार मार कर उनकी ज़मीनों से भगाती है, उनकी बस्तियां जलाती है,औरतों के साथ बलात्कार करती है,लेकिन समस्या टाटा अदाणी और अम्बानी नहीं हैं।
वह अपराध कर रहे हैं,खुले आम कर रहे हैं। बस्तर में घटी हुई कई दर्दनाक घटनाक्रम इस बात की चिख चिख की गवाही दे रही है।
समस्या आप हैं :-
आप अम्बानी,अदाणी टाटा,पुलिस,अर्ध सैनिक बलों और सेना के भक्त बने हुए हैं।आप इन अमीरों की सेवा करने वाली राजनीतिक विचारधारा को मानने वाली पार्टियों के वोटर बने हुए हैं।
आप मानते हैं कि अमीर अपनी मेहनत से अमीर बने हुए हैं। आप अपने बच्चों के सामने इन अमीरों के बच्चों को देखो क्या कुछ नही है उनके पास और क्या कुछ नहीं हो सकता है,लेकिन सवाल यही है आखिरकार आपको मिला क्या?

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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