नहर में पानी नहीं… खेतों में फसल नही
हर तरफ शराब की खाली शीशियां, पौवे, डिस्पोजल ग्लास और प्लास्टिक पाउच का साम्राज्य!

Vinod Netam

छत्तीसगढ़/ विभिन्न जिलों से विशेष खबर_
(Chhattisgarh junction) छत्तीसगढ़ की जमीनी हकीकत का यह वीडियो किसी एक गांव या एक नहर की कहानी नहीं है, बल्कि उस बदहाल सिस्टम का आईना है जिसने विकास के दावों को कूड़े के ढेर में बदल दिया है।
जहां नहरों में किसानों की उम्मीदें बहनी चाहिए थीं, वहां शराब की बोतलें तैर रही हैं।
जहां खेतों में लहलहाती फसल होनी चाहिए थी, वहां प्लास्टिक और गंदगी की परत जमी है।
सवाल सीधा है क्या यही है “विकास,क्या यही है “जमीनी सच्चाई?

गांव-गांव में खुलेआम बिकती शराब ने सामाजिक ढांचे को खोखला कर दिया है। नहर किनारे खाली शीशियों का अंबार इस बात का सबूत है कि व्यवस्था या तो आंख मूंदे बैठी है या फिर मौन स्वीकृति दे चुकी है। प्लास्टिक पाउच और डिस्पोजल ग्लास न सिर्फ पर्यावरण का गला घोंट रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर भी जहरीली परत चढ़ा रहे हैं।
यह सिर्फ गंदगी नहीं है
यह प्रशासनिक लापरवाही का पोस्टर है।
यह राजनीतिक प्राथमिकताओं की पोल खोलता दृश्य है।
जब सत्ता मंचों से खेती, रोजगार और विकास की बड़ी-बड़ी बातें करती है, तब जमीनी धरातल पर नहरें कचरा घर बन चुकी हैं। किसान कर्ज और चिंता में डूबा है, और गांव शराब की लत और प्रदूषण के बीच घिरता जा रहा है।

फसल नहीं उग रही… आदतें उग रही हैं।
पानी नहीं बह रहा… प्लास्टिक बह रहा है।
समझदारों के लिए इशारा काफी है।
यदि यही हाल रहा, तो खेतों से अनाज नहीं, बल्कि सामाजिक विघटन की कहानी निकलेगी।
अब सवाल जनता से भी है।क्या इस बदहाली पर सिर्फ वीडियो बनेंगे?या फिर जिम्मेदारों से जवाब भी मांगा जाएगा?

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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