विनोद नेताम (वरिष्ठ पत्रकार) छत्तीसगढ़

विशेष रिपोर्ट_
(Chhattisgarh junction) अंधभक्ति का दौर और लोकतंत्र की सबसे बड़ी चुनौती
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है। यह वही देश है जहाँ जनता को अपने शासकों से सवाल पूछने का अधिकार है और सत्ता को जनता के प्रति जवाबदेह होना पड़ता है।

लेकिन आज का दौर एक अजीब विडंबना का दौर बन गया है,जहाँ सवाल पूछने वालों को ही कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है और सत्ता की आलोचना को देशभक्ति के खिलाफ बताया जाता है।
वर्तमान राजनीति में सबसे बड़ा संकट यह दिखाई देता है कि लोकतांत्रिक विमर्श धीरे-धीरे व्यक्तिपूजा में बदलता जा रहा है। सत्ता के शीर्ष पर बैठे व्यक्ति को नीतियों और कार्यों के आधार पर परखा जाना चाहिए।

लेकिन आज एक बड़ा वर्ग उसे आलोचना से परे “महामानव”, “विश्वगुरु” और “राष्ट्र उद्धारक” के रूप में स्थापित करने में लगा है। यह प्रवृत्ति किसी भी लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत मानी जाती है।
देश के सामने बेरोज़गारी, महंगाई, सामाजिक तनाव और आर्थिक असमानता जैसे गंभीर सवाल खड़े हैं। लेकिन इन मुद्दों पर ठोस और गंभीर बहस के बजाय राजनीतिक विमर्श अक्सर प्रचार, छवि निर्माण और भावनात्मक नारों तक सीमित होकर रह जाता है। जनता को विकास के बड़े-बड़े सपने दिखाए जाते हैं, लेकिन जमीन पर कई जगह हकीकत इन दावों से मेल नहीं खाती।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि लोकतंत्र में असहमति की आवाज़ को संदेह की नजर से देखा जाने लगा है। सत्ता से सवाल पूछना लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन जब यही सवाल देशविरोध या धर्मविरोध के रूप में प्रस्तुत किए जाने लगें, तो यह लोकतांत्रिक संस्कृति के कमजोर होने का संकेत होता है।
इतिहास गवाह है कि किसी भी देश का भविष्य किसी एक व्यक्ति के कंधों पर नहीं टिका होता। राष्ट्र का निर्माण मजबूत संस्थाओं, जागरूक नागरिकों, वैज्ञानिक सोच, सामाजिक समरसता और जवाबदेह शासन से होता है।

अगर जनता अपनी उम्मीदों और भावनाओं को किसी एक नेता के इर्द-गिर्द केंद्रित कर देती है, तो लोकतंत्र की असली ताकत कमजोर पड़ने लगती है।
आज भारत के सामने सबसे बड़ी जरूरत यह नहीं है कि हम किसी नेता को देवता बना दें, बल्कि यह है कि हम लोकतंत्र की उस परंपरा को मजबूत करें जिसमें सत्ता से सवाल पूछना, नीतियों की आलोचना करना और बेहतर शासन की मांग करना हर नागरिक का अधिकार और कर्तव्य दोनों माना जाता है।
क्योंकि लोकतंत्र की असली ताकत किसी एक व्यक्ति की लोकप्रियता में नहीं, बल्कि जनता की जागरूकता और विवेक में छिपी होती है।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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