विनोद नेताम (वरिष्ठ पत्रकार)छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ / विशेष रिपोर्ट _
“धान का कटोरा” कहे जाने वाला छत्तीसगढ़ आज एक और कड़वी सच्चाई के कारण सवालों के घेरे में खड़ा है। प्रदेश के 400 घर आज भी सूने पड़े हैं, क्योंकि उनके मासूम चिराग अब तक लापता हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की मिसिंग चिल्ड्रन रिपोर्ट ने जो आंकड़े सामने रखे हैं, वे किसी भी संवेदनशील समाज को झकझोर देने के लिए काफी हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 13 महीनों में छत्तीसगढ़ से 982 बच्चे गायब हुए, जिनमें से 582 बच्चों को तो खोज लिया गया, लेकिन 400 बच्चे अब भी लापता हैं। यानी सैकड़ों परिवार आज भी अपने बच्चों की एक झलक पाने की उम्मीद में दरवाजे की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं।
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि 14 से 17 वर्ष की किशोरियां सबसे ज्यादा इस गुमशुदगी की शिकार हुई हैं। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उस भयावह सच्चाई का संकेत है जिसमें बेटियां असुरक्षा, तस्करी और अपराध के जाल में फंसती जा रही हैं।
और विडंबना देखिए,जनसंख्या के हिसाब से देश में 17वें स्थान पर रहने वाला छत्तीसगढ़, बच्चों की गुमशुदगी के मामले में 6वें नंबर पर पहुंच गया है। यह स्थिति किसी भी सरकार और प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी है।
सवाल यह है कि आखिर ये बच्चे जा कहां रहे हैं?
क्या यह मानव तस्करी का संगठित गिरोह है?
क्या हमारी पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था इतनी कमजोर हो चुकी है कि मासूमों को बचा नहीं पा रही?
या फिर यह सरकारी लापरवाही और सिस्टम की विफलता का नतीजा है?
हर गुमशुदा बच्चा सिर्फ एक आंकड़ा नहीं होता। उसके पीछे एक मां की सूनी गोद, एक पिता की टूटी उम्मीदें और एक पूरे परिवार की बिखरी दुनिया होती है।

लेकिन अफसोस की बात है कि सत्ता के गलियारों में यह दर्द अक्सर फाइलों के ढेर में दबकर रह जाता है।
अगर हालात ऐसे ही रहे तो यह सवाल और भी तीखा हो जाएगा,क्या छत्तीसगढ़ सचमुच सुरक्षित प्रदेश बन रहा है, या फिर मासूमों के लिए एक खतरनाक जमीन?
अब वक्त आ गया है कि सरकार, पुलिस और समाज सब मिलकर इस सवाल का जवाब दें। क्योंकि अगर 400 बच्चों का पता नहीं चल पा रहा, तो यह सिर्फ आंकड़ों की नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी की कहानी है।
और सच यही है।जिस प्रदेश में बच्चों का भविष्य सुरक्षित नहीं, वहां विकास के सारे दावे खोखले लगने लगते हैं।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

