विनोद नेताम

छत्तीसगढ़/बस्तर/ विशेष रिपोर्ट_

रायपुर से विशाखापट्टनम तक प्रस्तावित 464 किलोमीटर लंबे आर्थिक कॉरिडोर (एक्सप्रेसवे) को लेकर सरकार भले ही विकास के बड़े दावे कर रही हो, लेकिन बस्तर अंचल की वास्तविक कनेक्टिविटी को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े हो गए हैं।

परियोजना की अनुमानित लागत ₹16,491 करोड़ बताई जा रही है और इसे क्षेत्रीय व्यापार, पर्यटन तथा उद्योग को गति देने वाला बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित मार्ग कांकेर और कोंडागांव जिलों के बाहरी हिस्सों से होते हुए ओडिशा की ओर आगे बढ़ता है। ऐसे में बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर की दूरी इस मार्ग से लगभग 130–135 किलोमीटर रह जाती है। इस स्थिति में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि बस्तर क्षेत्र के लोगों को इस एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए किन बिंदुओं पर प्रवेश (इंटरचेंज) और संपर्क मार्ग विकसित किए जाएंगे।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि एक्सप्रेसवे तक पहुंच के लिए पर्याप्त लिंक रोड और इंटरचेंज की व्यवस्था नहीं की गई, तो इसका प्रत्यक्ष लाभ बस्तर क्षेत्र को सीमित ही मिल पाएगा। इस संदर्भ में सरकार की ओर से अब तक विस्तृत कनेक्टिविटी योजना सार्वजनिक नहीं किए जाने की भी चर्चा है।
वहीं, बस्तर की आधारभूत संरचना से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट भी लंबे समय से अधूरे हैं। केशकाल घाट बाईपास, जिसकी लंबाई लगभग 11 किलोमीटर है, बीते कई वर्षों से निर्माणाधीन है। यह मार्ग तैयार होने पर घाट क्षेत्र में यातायात दबाव कम करने और आवागमन को सुगम बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
इसी तरह, रावघाट–जगदलपुर रेल लाइन परियोजना भी वर्षों से लंबित है। यह रेल संपर्क बस्तर को सीधे राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। स्थानीय स्तर पर यह अपेक्षा जताई जा रही है कि इन परियोजनाओं को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाए, ताकि क्षेत्रीय विकास को वास्तविक गति मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े एक्सप्रेसवे का लाभ तभी व्यापक रूप से मिलता है, जब उससे जुड़े क्षेत्रों के लिए प्रभावी फीडर रोड, इंटरचेंज और मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जाए। बस्तर जैसे भौगोलिक रूप से संवेदनशील और विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र के लिए यह और भी जरूरी हो जाता है।
ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार एक्सप्रेसवे के साथ-साथ बस्तर की सीधी कनेक्टिविटी के लिए क्या ठोस योजना प्रस्तुत करती है, और लंबित परियोजनाओं को कब तक पूरा किया जाता है।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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