कांग्रेस शासनकाल में दवा सप्लाई के नाम पर फर्जी बिलिंग का आरोप, अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों का भुगतान,नए बिल पास कराने की कोशिश
रायपुर/ बेमेतरा :- कांग्रेस शासनकाल के दौरान बेमेतरा जिले में दवा सप्लाई के नाम पर एक बड़े आर्थिक घोटाले के गंभीर मामला सामने आए हैं।

आरोप है कि डॉ.मनीष चंदानी द्वारा दवा आपूर्ति के नाम पर केवल बिल प्रस्तुत किए गए, जबकि वास्तविक रूप से दवाओं की सप्लाई की ही नहीं गई।
सूत्रों के अनुसार, इस कथित घोटाले में अधिकारियों की मिलीभगत से लगभग 4 करोड़ रुपये के बिल पास कर दिए गए,जबकि जमीनी स्तर पर दवा आपूर्ति का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

इतना ही नहीं, बताया जा रहा है कि अब भी 2.50 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बिल पास करवाने की कोशिश जारी है, जिससे मामला और भी गंभीर हो जाता है।
विधायक पर भी रिश्वत का आरोप
सूत्रों का दावा है कि इस पूरे प्रकरण में बिलासपुर के एक विधायक को 20 लाख रुपये की मोटी रिश्वत दी गई,ताकि लंबित और नए बिलों को बिना आपूर्ति के ही स्वीकृति दिलाई जा सके। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल सरकारी धन की लूट है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ खुला खिलवाड़ भी है। 
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में दवाएं पहुंचीं ही नहीं, फिर भी भुगतान कर दिया गया, तो इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ा होगा।यह मामला सिर्फ आर्थिक अनियमितता नहीं,बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर अपराध बनता है।
जांच की मांग तेज :
इस कथित घोटाले को लेकर अब उच्चस्तरीय जांच और…
दवा सप्लाई से जुड़े दस्तावेजों की फॉरेंसिक ऑडिट
संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच
रिश्वत के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग तेज हो गई है।
फिलहाल, इस मामले में डॉ. मनीष चंदानी, संबंधित अधिकारियों और विधायक पक्ष से प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है।
प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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