भरे मंडई में बगैर राशन के अपने मेहमानों का क्या खाली थाली से स्वागत करेंगे ग्राम पंचायत चिटौद के निवासी।

विनोद नेताम

बालोद/ गुरुर :- अखंड भारत की कल्पना को अपनी सोंच सें अंजाम तक पंहुचाने वाले चाणक्य की माने तो सज्जन पुरुष वह होता है,जो अच्छे स्वभाव, शिष्टाचार उच्च नैतिक मूल्य वाला व्यक्ति हो,जिसमें दया ईमानदारी विनम्रता और दूसरों के प्रति सम्मान का भाव हो,वह केवल सभ्य देखने वाला नहीं बल्कि व्यवहार से भी परोपकारी और जिम्मेदार होता है,जो अपने शब्दों और कर्मों में संतुलन रखता है और दूसरों की भलाई का ख्याल रखता है।
खैर राष्ट्र निर्माण में सज्जन पुरषों का महत्वपूर्ण योगदान सदियों से होता हुआ आया है और यह सिलसिला आज के अमृतकाल रूपी कलजूग में भी सांय सांय तरीके से जारी रहने की सूचना जग जाहिर है,अब ऐसे में सवाल यह उत्पन्न होता है, कि अमृतकाल रूपी इस कलजूग के भीतर में सज्जन पुरूष आखिर कौन कौन है।
एक ओर जंहा अमृतकाल रूपी कलजूग के इस दौर में स्वयं सहायता समूह और पत्रकार के रूप में विराजमान साक्षात कलम के सिपाहीयों के लिए भी यह शब्द सदियों से बुद्धजीवी वर्ग समाज बड़े सम्मान के साथ उचारित करते हुए आ रहा है और उन्हें इस लिहाज से सभ्य समाज सम्मान की नजरों से देखा करते है,क्योंकि समाज को बेहतर दिशा प्रदान करने हेतू इनकी भूमिका बरसो से काबिले तारीफ माना जाता रहा है।

वैसे समाज की सोंच में कोई बुराई भी नहीं दिखाई देता है चूंकि एक पत्रकार को समाज का दर्पण होने का दर्जा प्रदान करता है और स्वंय सहायता समूह जो स्वंय की ही सहायता की बुनियाद पर टीकी हुए सहयोग की भावना को प्रदर्शित करती है। ऐसे में क्या ग्राम पंचायत चिटौद के भीतर में मौजूद इन तत्वो का समागम क्या समाज के लिये भले का काम और बेहतरी हेतू आचरण करने में सफल हो पा रही है यह एक बडा सवाल है।

बताया जा रहा है कि मां भगवती स्वंय सहायता समूह के नाम पर कथित पत्रकार केशव सिन्हा ने ग्राम पंचायत चिटौद के भीतर में तहलका मचा कर रख दिया है तथा इनके द्वारा मचाये जा रहे तहलका के चलते ना सिर्फ पूरा गांव चिदौद हलाकान है अपितु शासन और प्रसाशन की छवि भी धूमिल हो रही है।एक पत्रकार के लिये वैसे भी इस तरह की गतिविधि बनाए रखना शोभा प्रदान नही करता है।
बहरहाल यह सर्व विदित है कि देश के मेहनतकश अन्नदाता किसान,इस सरजंमी और इस मिट्टी के असल हकदार है,क्योंकि वे सीमेंट और छड के जरिये सपनों का शहर नही बसाते है,बल्कि कसम उड़ान छल्ले की शहर में बसे हुए लोगों के डायनिंग टेबल पर उनकी पंसद का खाना कैसे मुहैया हो सके इसके लिए अन्नदाता किसान साल के बारह मास अपने सपनो का शहर खेतोँ पर बसाते है।

बता दे कि छत्तीसगढ़ राज्य अधिक धान की पैदावारी के लिए धान के कटोरा नाम के जरिये समस्त चराचरा जगत के भीतर में विख्यात है और इसी के साथ पूरे देश भर में चावंल की बराबर उपलब्धता को बरकार रखने हेतू अपने दम पर खडा है।
हांलाकि इस दम के पीछे अंचल के मेहनत कश अन्नदाता माटीपुत्र किसानो का बहुत बडा योगदान है,जिन्हे समय पर शिवाय ठोकरों के अमृतकाल रूपी कुछ नही मिलता है और इस कडी में बलोद जिला के गुरूर तहसील अंतगर्त ग्राम चिटौद के ग्राम वासी भी शामिल हो चुके जिन्हे राशन के लिये इन दिनो आंय बांय तरीके से भटकना पड रहा है।

दरअसल ग्राम पंचायत चिटौद तहसील गुरूर जिला बालोद छग के ग्रामवासियो को उनके ग्राम के भीतर मौजूद सरकारी राशन दुकान विगत कई बरसो से रास नही आ रहा है और बाबत ग्रामवासीयों के द्वारा कई दफा शिकायत बालोद जिला प्रसासन के समक्ष ईमानदारी के साथ प्रस्तुत किया गया है। बावजूद इसके ग्रामीणों की इस समस्या का निराकरण आजतक संभव नही हो सका पाया है।
ग्रामीणों की इस समस्या को ध्यान में रखते हुए अनुविभागिय अधिकारी आर के सोनकर ने तत्काल समाधान करने की बात कही है।
नरेश पिपरे खाद्य निरिक्षक : ग्राम चिटौद में राशन दुकान को संचालन करने वाले आज किसी काम से बिलासपुर गए है, यह जानकारी मिली है और राशन दुकान के भीतर में आंबटन होने वाली राशन सामग्री भंडारित रहता है तथा भवन के भीतर में कोई भी शिकायत नही है शिवाय चूहों को छोड़कर।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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