महाशिवरात्रि की डूबकी से पहले घटिया सिस्टम ने किसानों के चने के खेत को डुबाया।

विनोद नेताम

कलयुग के इंद्रदेव की कमान से बेसुध हो गये जलतीर।

कुलिया माइनर की गेट ले उड़े चोर इधर खेत खलिहानों में लबालब जलभराव से चने एवं रबी फसल हुई पूरी तरह से चौपट।
किसान की उम्मीदों में फेरा पानी अब मुआवजा की मांग।
छत्तीसगढ़/बालोद/गुरुर/विशेष रिपोर्ट_
राजधानी रायपुर के महादेव घाट पर महाशिवरात्रि के दिन खारून नदी में होगा महा डूबकी।

लेकिन इस डूबकी के चक्कर में घनचक्कर बनकर क्यों रह गये सरबदा और नरबदा के किसान…आखिरकार किसानों के लिये बनाई गई नहर पर गेट क्यों नही लगाई गई है? साठ से सत्तर एकड़ फसल बर्बादी के कगार पर लेकिन जवाबदेही किसकी फिलहाल तय नही।

जलभराव से पूरी तरह से चौपट फसलें
बालोद छत्तीसगढ़ महतारी के अथक परिश्रमी और मेहनती माने जाने वाले सूबे के भीतर मौजूद अधिकांशतः करिया बेटा- बेटी माटीपुत्र अन्नदाता किसानों ने अपने लहू और पसीना के बदौलत हर साल की भांति इस बरस भी रबी फसल के सीजन में अपने उपजाऊ सरंजमी पर मुख्य रूप से दलहन और तिलहन की फसल अपनी खेतो पर अपने मेहनत के बलबूते लगा रखे हुये है,जिसमे मुख्य रूप से तिवारा (लाखडी)चना,उडद,मसूर,तुअर और सरसों जैसी दलहन और तिलहन की फसले शामिल है। यह दृष्य बालोद जिले की ऊपजाऊ सरजंमी पर सदियों से निरंतर दोहराया जा रहा है,हालांकि जिले के भीतर में मौजूद ज्यादातर किसान विगत कई बरसों से रबी फसल के सिजन में दलहन और तिलहन की सफलों को उगाना छोड़कर अपने खेतोँ पर धान की डबल पैदावारी भी करते हुए दिखाई दे रहे थे,लेकिन धान की फसल को रबी के इस मौसम में उगाने से पानी की किल्लत के साथ खेती किसानी में होने वाली आम परेशानी जग जाहिर है। वंही निरंतर भूमिगत जल स्त्रोत से पानी का दोहन एक बड़ी संकट बनकर उभरी है।
लिहाजा कुछ दिन पहले ही बालोद जिला कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने भी अपनी ओर से जिले के अन्नदाता माटी पुत्र किसानों से रबी सीजन के दौरान में दलहन और तिलहन कि फसल अपने खेतों में लेने हेतु गुजारिश करते हुए एक रिल में दिखाई दिया था।
बालोद कलेक्टर की गुजारिश पर बालोद जिले के संजारी बालोद विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक रणभूमि क्षेत्र की पावन धरा माने जाने वाले गुरुर विकासखंड क्षेत्र के ज्यादातर ग्राम पंचायत के भीतर मौजूद रहने वाले किसानों ने अपने खेतों पर दलहन और तिलहन कि फैसले उगा कर रखे हुये है जिसमें ग्राम पंचायत सरबदा के साथ आश्रित ग्राम नरबदा भी शामिल है। बता दे कि ग्राम पंचायत सरबदा सहित उसके आश्रित ग्राम नरबदा के भीतर में रहने वाले ज्यादातर किसानों ने अपने सैकड़ों एकड़ खेतों में तिवरा,चना, मूंग,मसूर,तुअर की फसल उगाये है,किंतु किसानों से दलहन और तिलहन की फसल उगवाने की इच्छा पालने वाली बालोद कलेक्टर महोदया की प्रशासन को तनिक भी भनक नही है कि उनके प्रशासन के भीतर में मौजूद घटिया सिस्टम इन किसानों की मेहनत पर पूरा पानी फेर दिया है। दरअसल तादुंला नहर जो कि ग्राम सरबदा और नरबदा से होकर गुजरती है वहां से बिते कल अचानक किसानों की खेतों पर पानी का सैलाब आ गया और चना की लहलहते हुये फसल कुछ मिनट में डूब गया।

बालोद आत्माबाद अनुविभागीय अधिकारी हीरालाल साहू से मोबाईल से बातचीत

किसानों की लगभग 60 से 70 एकड़ फसल चौपट हुई है।

इस बीच उक्त घटनाक्रम को लेकर यह जानकारी भी प्राप्त हुई है कि उक्त नहर में गेट की चोरी होने के चलते पानी किसानों की खेतों में पहुंची है,जबकि ऐसा नही होना चाहिए।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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