विनोद नेताम
छत्तीसगढ़/ विशेष रिपोर्ट_
समस्त चराचर जगत के भीतर में जन्म लेने वाला हर जीव जंन्तु यंहा तक मनुष्यों की मल तक को खाने वाला सुअर भी अपने रहने व बसने के स्थान को साफ सुथरा और बढ़िया देखना व रखना पंसद करता है।भले ही उसे समस्त चराचर जगत के भीतर में मौजूद रहने वाले प्राणी मात्र उसे गंदगी का खदान मानकर चलता हो,मतलब स्पष्ट और सीधा है कि गंदगी किसी भी जीव जंतु को पसंद नहीं हो सकती है।
ऐसे में मनुष्य जाती के विषय में यह कहा जाता है कि समस्त चराचर जगत के भीतर में मनुष्य जाती से बड़ा बुद्धिमान जीव कोई हो नहीं सकता है। ऐसे में अपने दिमाक की बत्ती को जलाते हुये और कसम उड़ान छल्ले की कहते हूये जरा सोचिये कि जब मनुष्य जाती समस्त चराचर जगत के भीतर मौजूद रहने वाले सभी जीव जंतु में अधिक बुद्धिमान है,तो क्या मनुष्य जाती की मनुष्यों का मल तक हजम कर जाने वाले सुअर से तूलना करना क्या वाकई में सही है। गौरतलब हो कि मनुष्यों की तुलना सुअर प्रजाति के जीव करना किसी भी स्तर पर सही नहीं माना जा सकता है, लेकिन जब मनुष्य सूअरों की हरकतों को अंजाम देने पर ऊतारू हो जाए तब क्या कहा जा सकता है। अवगत हो कि आधुनिकीकरण के इस दौर में एक तरफ जंहा मनुष्य मंगल और चांद की धरती पर बसने के लिये दिन रात तैयारी करने में जुटा हुआ नजर आ रहा है तो वंही दूसरी तरफ आधुनिकीकरण के इसी दौर में मनुष्य अपने रहने के स्थान यानि की शहरों को गंदगी से पाटने पर तूला हुआ भी नजर आ रहा है। अब ऐसे में गौर करने वाली बात यह है कि आखिर गंदगी साफ करने वाला सूअर बेहतर है या फिर अपने रहने व बसने के स्थान को गंदगी से पाटने वाला मनुष्य।
खैर राजधानी रायपुर सहित छत्तीसगढ़ के ज्यादातर शहरों की हालत आमतौर पर लोगों को खस्ता हाल नजर आती है,जबकि प्रदेश के भीतर मौजूद छत्तीसगढ़ के शहरों को किस तरह से दिखाई देना चाहिए यह बंया करने की जरुरत तनिक भी नहीं है। खैर प्रदेश के नेताओं को कभी खुद से फुर्सत मिले तो इस विषय पर जरूर विचार करे इसमें कोई बुराई भी नहीं है, क्योंकि जनता ने आपको बढिया सोंचने और बढिया काम करने के लिये ही सत्ता पर बिठाया है। दरअसल सिर्फ डोल्डिंग और पोस्टरों के जरिये बड़े बड़े तूर्रा छोड़ने वाले जनप्रतिनिधियों को यह समझना होगा कि उनके रहते हुए भी उनके शहरों में मेन रोड पर लगे हुये पीडब्ल्यूडी के सांकेतिक बोर्ड नेताओं के बैनर-पोस्टरों से ढके रहते है,जबकि आज तक यातायात सुरक्षा के लिए लगाए गए ये बोर्ड कब प्रचार के होर्डिंग बन गए, किसी ने जवाब देना जरूरी नहीं समझा है।
जब इन्हें हटाया जाता है, तो लगने लगता है, कि शायद विभाग ने अपनी जिम्मेदारी समझ ली है। लेकिन यह राहत कुछ ही दिनों की साबित होती है और फिर वही कहानी वही सांकेतिक बोर्ड, वही नेताओं के पोस्टर।

सवाल यह है कि क्या पीडब्ल्यूडी सिर्फ दिखावटी कार्रवाई करता है?क्या नियम आम जनता के लिए हैं और राजनीतिक पोस्टरों के लिए नहीं?
सांकेतिक बोर्ड किसी नेता की पहचान नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा के लिए होते हैं। इन्हें ढकना सीधे तौर पर दुर्घटनाओं को न्योता देना है। इसके बावजूद @PWDCgGov
की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। क्या विभाग पर राजनीतिक दबाव है, या फिर लापरवाही अब सिस्टम का हिस्सा बन चुकी है? अगर नियम हैं तो सबके लिए हों।
वरना यह मान लिया जाए कि सड़कें भी अब प्रचार का मैदान हैं और सुरक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित है।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

