रायगढ़ में ‘भू-माफिया’ राज! सार्वजनिक तालाब पर कब्जा और गरीबों के आशियानों पर चला बुलडोजर।

विनोद नेताम
छत्तीसगढ़/रायगढ़/ विशेष रिपोर्ट_
रायगढ़ न्यायधानी के पड़ोसी जिले रायगढ़ में इन दिनों विकास की आड़ में विनाश और अवैध कब्जे का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। जिले के जूटमिल क्षेत्र से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ रसूखदार बिल्डरों और कॉलोनाइजर्स पर न केवल सार्वजनिक तालाब को पाटने, बल्कि विरोध करने वाले ग्रामीणों के मकानों को अवैध रूप से ढहाने का आरोप लगा है।

तालाब की बलि और पर्यावरण से खिलवाड़ : शिकायत के अनुसार, जूटमिल परिसर में स्थित एक विशाल तालाब, जिसका उपयोग स्थानीय निवासी दशकों से निस्तारी और सार्वजनिक कार्यों के लिए करते आ रहे हैं, अब भू-माफियाओं के निशाने पर है। कृष्णा रियल्टी और रायगढ़ प्रॉपर्टीज से जुड़े रसूखदारों द्वारा बिना किसी सक्षम शासकीय अनुमति के इस तालाब में धड़ल्ले से मिट्टी डंप की जा रही है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि जल निकायों को इस तरह पाटना न केवल जल संरक्षण नियमों का उल्लंघन है, बल्कि भविष्य में क्षेत्र के वाटर लेवल को भी गंभीर रूप से प्रभावित करेगा। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस अवैध कृत्य की जानकारी होने के बावजूद संबंधित विभाग मौन साधे बैठा है।

दबंगई की पराकाष्ठा : अनुपस्थिति में ढहा दिया मकान – मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता लखेंद्र महतो और उनके साथियों ने इस अवैध कब्जे का विरोध किया। आरोप है कि गैर-आवेदकों ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हुए पीड़ितों की अनुपस्थिति का फायदा उठाया और उनके मकान के सुपर स्ट्रक्चर (निर्मित ढांचे) को अवैध रूप से ध्वस्त कर दिया।

पीड़ित लखेंद्र महतो ने व्यथा सुनाते हुए कहा, “हम गरीब लोग पाई-पाई जोड़कर घर बनाते हैं, लेकिन इन रसूखदारों ने बिना किसी नोटिस या कानूनी प्रक्रिया के हमारे घर को खंडहर बना दिया। हमें न केवल आर्थिक चोंट पहुँची है, बल्कि हम मानसिक रूप से भी टूट चुके हैं।”

इन रसूखदारों के खिलाफ मोर्चा – कलेक्टर को सौंपे गए आधिकारिक पत्र में सात प्रमुख नामों का उल्लेख किया गया है, जिनमें कृष्णा रियल्टी के अजय अग्रवाल, नवीन कुमार बंसल, श्रवण अग्रवाल, अनूप बंसल, घनश्याम डालमिया, और रायगढ़ प्रॉपर्टीज के डायरेक्टर रोहन बंसल व अमित मित्तल शामिल हैं। आरोप है कि इन सभी की मिलीभगत से क्षेत्र में भय का माहौल व्याप्त है।

प्रशासनिक उदासीनता पर भड़का आक्रोश : हैरानी की बात यह है कि पीड़ितों द्वारा पूर्व में कई बार ईमेल और लिखित शिकायतों के माध्यम से प्रशासन को आगाह किया गया था। लेकिन, “आज तक कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई” – यह जुमला अब ग्रामीणों के आक्रोश का कारण बन रहा है। लोगों का कहना है कि प्रशासन की इसी सुस्ती ने भू-माफियाओं के हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि वे अब कानून को ठेंगे पर रख रहे हैं।

*पीड़ितों की मुख्य मांगें
* तत्काल रोक : तालाब को पाटने के काम पर तुरंत रोक लगाकर उच्च स्तरीय जांच की जाए।
* एफआईआर दर्ज हो :मकान तोड़ने के जिम्मेदार लोगों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो।
* मुआवजा :पीड़ित परिवार को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई की जाए।
* बहाली :तालाब को खोदकर उसकी पूर्व स्थिति में वापस लाया जाए।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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