विनोद नेताम (वरिष्ठ पत्रकार)
नई दिल्ली/पंजाब/विशेष रिपोर्ट _
कृषि के मोर्चे पर अमेरिका के साथ प्रस्तावित डील ने मोदी सरकार को ऐसे दो राहे पर ला खड़ा किया है, जहां हर रास्ता जोखिम भरा दिखता है।एक ओर वैश्विक दबाव और रणनीतिक साझेदारी की मजबूरी है,तो दूसरी ओर देश के किसानों की आशंकाएं, जो पहले से ही नीतिगत प्रयोगों से आहत महसूस कर रहे हैं।
भारत सहित अन्य राज्यों से उठती किसान आंदोलन की आहट सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि उस अधूरे संवाद का परिणाम है जो सरकार और किसानों के बीच लंबे समय से टूटा हुआ है।
“इस बार संसद में घुसेंगे” जैसे शब्द लोकतंत्र के लिए गंभीर संकेत हैं ये गुस्सा भी है और हताशा भी, किसान कोई अराजक समूह नहीं, बल्कि वही वर्ग है जिसकी मेहनत पर देश की खाद्य सुरक्षा टिकी है। अगर आज वही किसान संसद तक पहुंचने की बात कर रहा है, तो सवाल किसानों से ज़्यादा सत्ता के गलियारों से पूछा जाना चाहिए आख़िर संवाद कहां और क्यों टूटा?
सरकार की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ क़ानून बनाना नहीं, बल्कि असहमति को सुनना और समाधान निकालना भी है। बार-बार आंदोलनों का रास्ता अपनाना किसी भी लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं होता।
दूसरी ओर, आंदोलन की भाषा और दिशा भी संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर रहनी चाहिए, ताकि असली मुद्दा शोर में न दब जाए। आज ज़रूरत टकराव की नहीं, भरोसे की है।

किसान संसद तक नहीं, समाधान तक पहुंचना चाहता है। अगर सरकार समय रहते गंभीर बातचीत का रास्ता खोलती है, तो सड़कों पर उबाल और लोकतंत्र पर दबाव दोनों से बचा जा सकता है।
क्योंकि कृषि समझौते केवल कागजी दस्तावेज नहीं होते, वे देश की रीढ़ से जुड़े होते हैं। आज ज़रूरत है पारदर्शिता, संसद में खुली बहस और किसानों को विश्वास में लेने की।
वरना अमेरिका डील सरकार के लिए कूटनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि घरेलू संकट की वजह बन सकती है।क्योंकि खेती में लिया गया हर फैसला, अंततः लोकतंत्र की ज़मीन पर ही परखा जाता है। वहीं ऐसी चेतावनियां इतिहास बनती हैं,और समाधान भविष्य तय करते हैं।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

