मरीजों की जान बचाने वाले संजीवनी 108 वाहन खुद लकवा ग्रस्त हालात में खुद की ईलाज के लिए सिस्टम की लाचारी का दंश झेलने को मजबूर।

विनोद नेताम (वरिष्ठ पत्रकार)

छत्तीसगढ़ । बालोद । गुरुर। विशेष रिपोर्ट _

छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा अगर बदहाल की स्थिति है तो वो है
सरकारी अस्पताल में मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की। क्योंकि समय पर न तो मरीजों को एम्बुलेंस मिल रही है। और न ही ईलाज के लिए बेहतर सुविधा मिल रही है। ऐसे में लोग सरकारी अस्पताल के बजाए प्राइवेट हॉस्पिटल में ईलाज कराने को मजबूर हो रहे है।
“तकनीकी खराबी से जूझ रही एंबुलेंसें,आपातकाल में मरीजों को नहीं मिल पा रही समय पर मदद”
छत्तीसगढ़ में आपातकालीन सेवा के तहत संचालित छत्तीसगढ़ 108 संजीवनी एक्सप्रेस की कई एंबुलेंस तकनीकी खराबी के कारण खड़ी होने की जानकारी सामने आई है।

जमीनी पड़ताल में पता चला कि कई जिलों में वाहन इंजन फेल,ऑक्सीजन सिस्टम की दिक्कत, स्ट्रेचर लॉक खराब होने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

आपको बता दे कि छत्तीसगढ़ के बालोद जिला गुरुर उपस्वास्थ्य केंद्र में आपातकालीन सेवा के लिए 108 की दो एंबुलेंस सेवा दे रही थी, फिर हाल वर्तमान में एक भी एंबुलेंस गुरुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आपातकालीन व्यवस्था के लिए संजीवनी एक्सप्रेस 108 नहीं होने के कारण मरीजों को समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने से क्षेत्र के लोगों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने से,समय पर ईलाज नहीं हो पा रही है।आपातकालीन सेवा देने वाली गुरुर की दोनों वाहन खराब बताए जा रहे है। जिसके चलते मरीजों को समय पर वाहन न मिल पा रही है। ऐसे में गरीब और गंभीर बीमारी वाले लाचार व्यक्ति को समय रहते वाहन और ईलाज की सुविधा नहीं मिला तो उसकी जान भी जा सकती है।

गुरुर स्वास्थ्य केंद्र में धूल खाती जर्जर हालात में पड़ा हुआ संजीवनी एक्सप्रेस

तो वहीं पलारी उपस्वास्थ्य केंद्र में आपातकालीन सेवा दे रही 108 संजीवनी वाहन ही अकेले पूरे गुरुर विकास खंड में दौड़ रही है।

जर्जर अवस्था में पड़े अपनी बदहाल स्थिति का दंश झेलते 108 संजीवनी एक्सप्रेस

ऐसे में क्या एक ही वाहन समय पर सेवा दे पाएगा क्या मरीजों के साथ खिलवाड़ करने वाले क्या ऐसे टेंडर धारियों पर सरकार नकेल कस पाएगा या फिर मरीजों को सुविधा प्रदान करने वाली संजीवनी 108 एक्सप्रेस कंपनी अपनी मनमानी चलाते रहेंगे।
108 वाहनों के संबंध में आई रिपोर्ट के अनुसार, साल 2019 से संचालित एंबुलेंसों की हालत बिगड़ती जा रही है। नियमों के मुताबिक, तीन लाख किलोमीटर से ज्यादा चल चुकी गाड़ियों को बंद किया जाना चाहिए इन गाड़ियों का नियमित निरीक्षण भी नहीं किया जा रहा। जिससे इनकी फिटनेस पर सवाल उठ रहे हैं।
एक साल पूर्व( 2025) में छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाईकोर्ट इस मामले को लेकर फटकार भी लगा चुके है।
हाईकोर्ट (बिलासपुर) में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा तथा जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने संजीवनी 108 एंबुलेंस गाड़ियों की बदहाल स्थिति पर नाराजगी जताई और परिवार कल्याण विभाग के सचिव को नोटिस जारी करके जवाब मांगने का आदेश दिया था।
उसके बावजूद छत्तीसगढ़ के बालोद जिला गुरुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक महीने से जर्जर हालातों में खराब पड़े 108 संजीवनी एक्सप्रेस पुनः दौड़ पाएगा कि नहीं यह एक गंभीर सवाल है।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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