विनोद नेताम ( वरिष्ठ पत्रकार)

नई दिल्ली/ विशेष रिपोर्ट _
भाभीजी का इंटरव्यू देखा।उत्साही,प्लेजेंट,चाक चौबंद,परफेक्ट टू वर्ड एंड बॉडी लैंग्वेज।
किसी मजमे में अपने संस्थान के प्रचार के लिए एक करोड़ लोगों में किसी को चयन करना हो, तो मैं भी भाभीजी को चयन करूँगा।
गलगोटिया ने भी यही किया।
देन व्हाट इज रॉन्ग??
गलगोटिया, कोई खराब एजुकेशन संस्था नही है। मोदी जी 2019 में बेस्ट यूनिवर्सिटी का अवार्ड दे चुके है। योगी जी ने पुरस्कृत किया है।संबित पात्रा इसके कन्वोकेशन में गए हैं। पीयूष गोयल गए हैं। दर्जनों दूसरे बड़े लोग भी..
ऐसे हवा में ही चयन तो होगा नही।
चरनचुम्बक तो औऱ भी यूनिवर्सिटी है न।
तो यहाँ फेकल्टी अच्छी है, इंफ्रास्ट्रक्चर शानदार है। मोटी गांठ वालो के बच्चे मोटी फीस देकर आते हैं। याने पीयर लेवल भी अच्छा होगा। फोटोबाजी बताती है कि आयोजन वगैरह ग्रैंड स्केल पर करते है।
देंन व्हाट इज रॉन्ग??
●वी आर डी फर्स्ट यूनिवर्सिटी टू स्पेंड 350 करोर ऑन एआई एंड डेटा सेंटर।
“वी हैव ए होल ब्लॉक फ़ॉर दिस..”

350 करोड़ खर्च किया है AI ब्लॉक बनाने में।चकाचक बिल्डिंग, कम्प्यूटर खरीद,वाईफाई आदि में।
350 नही, लेकिन 35 करोड़ तो खर्च अवश्य किये होंगे।पर गलगोटिया हो, या सरकारी स्कूल। शिक्षा के नाम का फंड, निर्माण पर खर्च होता है।
सीमेंट, गिट्टी, गारे पर।
गाँव के स्कूल में एजुकेशन के नाम पर बाउंड्री वाल बनती है, किचनशेड बनता है। वैसे ही भाभी ने AI ब्लॉक बनाने पर खर्च गिना दिया।
लेकिन बिल्डिंग बनाने से रिसर्च नही होती। मंजी हुई फेकल्टी, मिशन में लगे रिसर्चर, सोफ्टवेयर टूल्स, डेटा एक्वीजिशन, एक्सपोजर, स्टूडेंट एक्सचेंज की जरूरत है। मैनेजमेंट किस तरह का, किस उपयोग का AI बना रहे है, भाभी ने नही बताया।
●बना रहे होते, तो जरूर बताते।
आप तो AI के नाम पे रोबोटिक कुत्ता दिखा रहे हो। अगर खुद का बनाया कुत्ता होता, तब भी..
AI अलग है रे भईया,
और रोबोटिक्स अलग चीज है।
यह बात आम आदमी को न पता हो, पर 350 करोड़ रोकड़ा लुटाने वालो को पता होनी चाहिए।
●और जो भारत मण्डपम में इन्हें ला लाकर बिठा रहे है, उन अफसरों/आयोजको को भी,हर दावे, हर मॉडल की प्री स्क्रीनिंग करनी चाहिए थी।
की भी गई होगी – खानापूर्ति।आखिर वर्ल्ड AI समिट था,
बड़ी पापड़ व्यापार मेला नही।
लेकिन माहौल वही बनाया गया था। भाभीजी सेल्सगर्ल बनाकर बिठाई गयी थी।
बेचारी ने अपना काम बखूबी किया। लेकिन एक सीमेंट गारा, कॉपी,पायरेसी,झूठ, फ़ेंकमफेंक वाली व्यवस्था पर, बलि की बकरी बन गईं।
इस समिट में कितने पेटेंट निकले, किसी ने खबर नही दी। खबर बस यह है,कि भाभी की नौकरी ले ली गयी है।
भाभीजी घर पर हैं।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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