विनोद नेताम ( वरिष्ठ पत्रकार)

छत्तीसगढ़/विशेष रिपोर्ट_

डबल इंजन का फैसला – छत्तीसगढ़ में होली के दिन भी शराब दुकानें खुली रहेंगी।
इससे पूर्व में हुए फैसले में देखें:-
छत्तीसगढ़ में 100 नई शराब दुकानें (पूर्व में 67)
शराब के रेट कम करने कैबिनेट का फैसला
रेवेन्यू बढ़ाने विवेकानंद एयरपोर्ट में वाइन शॉपशहरों के गली नुक्कड़ में प्रीमियम वाइन शॉप गांधी जयंती जैसे शुष्क दिवस में भी शराब बिक्रीप्लास्टिक की बोतलों में शराब, छोटे मिनिएचर भी होंगे उपलब्ध
पिछले दो सालों में सरकार ने हर वो कदम उठाए जो छत्तीसगढ़ को नशे की आगोश में धकेलने का काम कर रहे हैं। मुनाफा कमाने इन्होंने नैतिकता भी गिरवी रख दी है।
हमने ही बनाया है और हम ही दारू पिला के बर्बाद करेंगे के सपने को साकार करती हुई भाजपा सरकार।
छत्तीसगढ़ में अब होली, मुहर्रम, महात्मा गांधी निर्वाण दिवस (30 जनवरी) के दिन भी शराब बेचेगी सरकार।

अब हर घर मोदी नहीं बल्कि हर घर आधा पाव शराब की बोतले मिलेंगे खाने की जगह रसोई घर में।
सरकार ने नई आबकारी नीति में संसोधन करते हुए 7 ड्राई डे में से 3 दिन समाप्त कर दिए गए हैं। इनमें होली, मुहर्रम, महात्मा गांधी निर्वाण दिवस (30 जनवरी) भी शामिल है। इन तीन दिनों पर अब राज्य में शराब बिक्री पर प्रतिबंध नहीं रहेगा। यानि की ब्लैक में मंहगी दारू पीने का टेंशन खत्म। मतलब साफ है जी भर के पीओ और मन भर के पीओ।

नए नीति के अनुसार साल 2026-27 में सिर्फ 4 दिन ड्राई डे घोषित किए गए हैं। इनमें 26 जनवरी गणतंत्र दिवस, 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस, 2 अक्टूबर गांधी जयंती और 18 दिसंबर गुरु घासी दास जयंती शामिल हैं।

ऐसे में जरा सोंचिए एक तरफ जंहा भारतीय जनता पार्टी के अधिकांश तह फूलछाप कमल भैय्ये नेताओं की फौज अपने आप को सनातन संस्कृति से जोडकर खुद को समाज के लिये जरूरी बताते हुए तूतुर बजा कर यह कहते हुये दिखाई देते है कि शराब समाज के लिये जहर है।

वंही दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ में स्थित भाजपा की विष्णुदेव सरकार शराब बंद करने के बजाए नित नये दिन शराब के मामले में नया नया प्रयोग कर रहे है।कभी शेरा, तो कभी शोले, कभी युनिक तो कभी कुछ और जबकि छत्तीसगढ़ प्रदेश की पवित्र सरजंमी को अपने खून और पसीने की कमाई से उपजाऊ बनाने वाले मेहनती मजदूरों और किसानों को पेट भर के दो वक्त का अनाज और चैन की नींद की आवश्यकता है ना कि शराब की।

एक तरफ जंहा केंन्द्र सरकार में स्थित बड़े-बड़े नेतागण आए दिन छत्तीसगढ़ की इस पावन सरजमीं पर दौरा ऊपर दौरा कर रहे हैं और इनके दौरा करने के बाद छत्तीसगढ़ महतारी की कोख के भीतर मौजूद खनिज संपदा की बोल लग रही है।

बावजूद इसके छत्तीसगढ़ महतारी के मेहनती मजदूर और किसान को छत्तीसगढ़ शराब जैसी जहर क्यों बांटने में तूली हुई है यह एक बड़ा सवाल है।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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