विनोद नेताम (वरिष्ठ पत्रकार)
नई दिल्ली/ विशेष रिपोर्ट_
गलगोटिया यूनिवर्सिटी का रोबोटिक कुत्ता बनाने का दावा, AI जलसे में भारत का वैश्विक मखौल बना गया। आयोजन की बदइंतजामी, और गलगोटिया का हल्कापन कोई एक घटना भर नही- झूठ की संस्कृति का फल है।
ठगबाजी का खाद पानी, अब हर वृक्ष पर, हर सेक्टर में भरपूर फसल दे रहा है।
●एक दशक पहले,बड़े विजन,बड़े दावों, बड़े वादों का जो महल बनाया गया था, वह तो 3 -4 साल में ही ध्वस्त हो चुका था।
तो सच दबाने औऱ झूठ का पहाड़ खड़ा करने में पूरा सिस्टम जुट गया। आर्थिक सर्वे बन्द हुए।रोजगार के सर्वे बन्द हुए। NSSO की नियमित सैम्पलिंग और रिपोर्ट बन्द हुई।
सीएजी की रिपोर्ट घटकर 40% रह गई। मंत्री कुछ और समां बांधता है, मंत्रालय की रिपोर्ट कुछ और बताती है।
नियमित समीक्षा और स्टडी करने वाला योजना आयोग बन्द हो गया। उस भवन में एक नीति आयोग बैठ गया, जिसका मैंडेट क्या है, उसे खुद नही पता।
●और फिर भोंपू लगाकर ठग्गू दावों का झरना शुरू हुआ।
जो मुंह मे आये, आंकड़ा बोलो।
जो मर्जी, दावा कर दो।
कुछ भी बोल दो।
वेरिफिकेशन का स्रोत तो पहले बन्द किया जा चुका है। पार्टी हो, ट्रोल हो, कोर्ट में एटॉर्नी जनरल हो, इलेक्शन कमीशन हो, सब का एक ढर्रा।
जिम्मेदार पदों पे बैठकर अव्वल दर्जे की बेशर्मी, परले दर्जे की धूर्तता। और इस धूर्तता को हमारे हर्षोल्लसित समर्थन ने, इसे जरूरी स्किल, आधुनिक विज्ञान और उच्चतम कला के रूप में मान्यता दिलवाई है।
●झूठ ब्रह्मास्त्र है। हेकड़ी तर्क है।
युवा सीख गया है। प्राइवेट उद्यमी, इंसिटीट्यूशन सीख गए हैं। आम कर्मचारी/अधिकारी सीख गए हैं। तो गलगोटिया यूनिवर्सिटी क्यो न सीखे??
वो कोई अलग लोक नही। दरअसल वह आधुनिक भारत का इंसिटीट्यूशन है। जहाँ शिक्षित, सुदर्शन, सक्षम, योग्य, साधनसम्पन्न लोग भरे पड़े हैं, जिनके काम की गुणवत्ता स्वयं बोलनी चाहिए थी, उनकी जुबान बोल रही है
झूठ बोल रही है।
●अपने छात्रों को बताया होगा- इन्वेंशन बकवास है। बाहरी माल खरीदो, अपना डेवलपमेंट बताओ। इन्टरनेशनल समिट में वाहवाही पाओ।
पीएम हमारे स्टॉल में फोटो होगी, प्रचार होगा।एडमिशन मिलेंगे। इन्वनेंशन तो इनका उद्देश्य ही नही था।
●झूठ का परनाला, ऊपर गंगोत्री से बहेगा, तो बाकी जगह सचाई का बोलबाला होगा, सम्भव नहीं।
सत्य, ईमानदारी, मेहनत, मेधा- गांधियन/नेहरूवियन वैल्यूज कहकर कूड़ेदान में फेंके जा चुके। शिक्षा केंद्रों पर वफादारों का राज है। गोबरोलॉजी, एस्ट्रोलॉजी, गणेश जी की सर्जरी, कणाद का न्यूक्लियर साइंस उनके टॉकिंग पॉईंट है।
छल, सेटिंग, बेईमानी, दबाव, डर और दंगा उनकी सफलता के टूल्स है।वफादारी कवच और कुंडल है। गलगोटिया उनका आदमी है। उनका समर्थक है। पहले भी पकड़ा गया था, जब इसके छात्र सरकार समर्थंक रैली निकालने भेजे गए थे।
पर तब कुछ न बिगड़ा, अब भी न बिगड़ेगा।
●गलगोटिया यूनिवर्सिटी अभी औऱ प्रगति करेगी। फिर फिर पकड़ी जाएगी, फिर दाँत निपोरेगी। लेकिन फिर से वही करेगी।
उसकी आलोचना मत कीजिए।
उससे सीखिए।
आप पिछड़ न जायें। झूठ बोलना सीखिए।ठगी कीजिये। यही इस देश मे सफलता की रेसिपी है।क्योकि इस देश का गलगोटियाकरण, किया जा चुका है।
झूठिस्तान में आपका स्वागत है।
NSSO की नियमित सैम्पलिंग और रिपोर्ट बन्द हुई।
सीएजी की रिपोर्ट घटकर 40% रह गई। मंत्री कुछ और समां बांधता है, मंत्रालय की रिपोर्ट कुछ और बताती है।
नियमित समीक्षा और स्टडी करने वाला योजना आयोग बन्द हो गया। उस भवन में एक नीति आयोग बैठ गया, जिसका मैंडेट क्या है, उसे खुद नही पता।
●और फिर भोंपू लगाकर ठग्गू दावों का झरना शुरू हुआ।
जो मुंह मे आये, आंकड़ा बोलो।
जो मर्जी, दावा कर दो।
कुछ भी बोल दो।
वेरिफिकेशन का स्रोत तो पहले बन्द किया जा चुका है। पार्टी हो, ट्रोल हो, कोर्ट में एटॉर्नी जनरल हो, इलेक्शन कमीशन हो, सब का एक ढर्रा।
जिम्मेदार पदों पे बैठकर अव्वल दर्जे की बेशर्मी, परले दर्जे की धूर्तता। और इस धूर्तता को हमारे हर्षोल्लसित समर्थन ने, इसे जरूरी स्किल, आधुनिक विज्ञान और उच्चतम कला के रूप में मान्यता दिलवाई है।
●झूठ ब्रह्मास्त्र है। हेकड़ी तर्क है।
युवा सीख गया है। प्राइवेट उद्यमी, इंसिटीट्यूशन सीख गए हैं। आम कर्मचारी/अधिकारी सीख गए हैं। तो गलगोटिया यूनिवर्सिटी क्यो न सीखे??
वो कोई अलग लोक नही। दरअसल वह आधुनिक भारत का इंसिटीट्यूशन है। जहाँ शिक्षित, सुदर्शन, सक्षम, योग्य, साधनसम्पन्न लोग भरे पड़े हैं, जिनके काम की गुणवत्ता स्वयं बोलनी चाहिए थी, उनकी जुबान बोल रही है
झूठ बोल रही है।
●अपने छात्रों को बताया होगा- इन्वेंशन बकवास है। बाहरी माल खरीदो, अपना डेवलपमेंट बताओ। इन्टरनेशनल समिट में वाहवाही पाओ।
पीएम हमारे स्टॉल में फोटो होगी, प्रचार होगा।एडमिशन मिलेंगे। इन्वनेंशन तो इनका उद्देश्य ही नही था।
●झूठ का परनाला, ऊपर गंगोत्री से बहेगा, तो बाकी जगह सचाई का बोलबाला होगा, सम्भव नहीं।
सत्य, ईमानदारी, मेहनत, मेधा- गांधियन/नेहरूवियन वैल्यूज कहकर कूड़ेदान में फेंके जा चुके। शिक्षा केंद्रों पर वफादारों का राज है। गोबरोलॉजी, एस्ट्रोलॉजी, गणेश जी की सर्जरी, कणाद का न्यूक्लियर साइंस उनके टॉकिंग पॉईंट है।
छल, सेटिंग, बेईमानी, दबाव, डर और दंगा उनकी सफलता के टूल्स है।वफादारी कवच और कुंडल है। गलगोटिया उनका आदमी है। उनका समर्थक है। पहले भी पकड़ा गया था, जब इसके छात्र सरकार समर्थंक रैली निकालने भेजे गए थे।
पर तब कुछ न बिगड़ा, अब भी न बिगड़ेगा।
●गलगोटिया यूनिवर्सिटी अभी औऱ प्रगति करेगी। फिर फिर पकड़ी जाएगी, फिर दाँत निपोरेगी। लेकिन फिर से वही करेगी।
उसकी आलोचना मत कीजिए।
उससे सीखिए।
आप पिछड़ न जायें। झूठ बोलना सीखिए।ठगी कीजिये। यही इस देश मे सफलता की रेसिपी है।क्योकि इस देश का गलगोटियाकरण, किया जा चुका है।
झूठिस्तान में आपका स्वागत है।
वफादारी कवच और कुंडल है। गलगोटिया उनका आदमी है। उनका समर्थक है। पहले भी पकड़ा गया था, जब इसके छात्र सरकार समर्थंक रैली निकालने भेजे गए थे।
पर तब कुछ न बिगड़ा, अब भी न बिगड़ेगा।
●गलगोटिया यूनिवर्सिटी अभी औऱ प्रगति करेगी। फिर फिर पकड़ी जाएगी, फिर दाँत निपोरेगी। लेकिन फिर से वही करेगी।
उसकी आलोचना मत कीजिए।
उससे सीखिए।
आप पिछड़ न जायें। झूठ बोलना सीखिए।ठगी कीजिये। यही इस देश मे सफलता की रेसिपी है।क्योकि इस देश का गलगोटियाकरण, किया जा चुका है।
झूठिस्तान में आपका स्वागत है।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

