विनोद नेताम ( वरिष्ठ पत्रकार)
छत्तीसगढ़/बालोद/विशेष रिपोर्ट _
छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज प्रस्तुत किया गया राज्य का वित्तीय बजट “डबल इंजन सरकार” की हकीकत दिखाता है,जो राज्य को आगे नहीं ले जा रही, बल्कि पीछे की ओर खींच रही है।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने किसानों, युवाओं और महिलाओं के नाम पर बड़ी-बड़ी घोषणाएँ तो की हैं, लेकिन पिछले बजटों की घोषणाओं का भी पूरा क्रियान्वयन नहीं हुआ है।

उनके अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं, रोजगार सृजन और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है।
चंद्रेश हिरवानी कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि बालोद सहित पूरे प्रदेश में सड़क, सिंचाई और शिक्षा से जुड़ी कई परियोजनाएँ अधूरी पड़ी हैं। बजट में इनके लिए पर्याप्त और स्पष्ट प्रावधान नज़र नहीं आते। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार आंकड़ों के सहारे “विकास का भ्रम” पैदा करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने मांग की कि सरकार घोषणाओं के बजाय धरातल पर काम करे और पिछले वादों की प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करे।
इस बजट में कुल बढ़ोतरी मात्र ₹7,000 करोड़ की है – जिसमें रोज़गार सृजन के लिए कोई ठोस रोडमैप नहीं, इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए कोई स्पष्ट योजना नहीं, और राजस्व सृजन का कोई प्रभावी माध्यम नहीं है।
राज्य के संविदा कर्मचारियों को पिछले 3-3 महीनों से वेतन नहीं मिला है। पिछले वित्तीय वर्ष में जिन कार्यों को स्वीकृति मिली थी, वे या तो अब तक शुरू ही नहीं हो पाए हैं या फिर अधूरे पड़े हैं। मध्यान भोजन की रसोइयां पिछले कई महिनों से हड़ताल पर है उनका मानदेय नहीं बढ़ा है। सत्ता पक्ष के विधायक तक सरकार के कार्यप्रणाली से खुश नही है।रिलबाजी के साथ झूठा प्रचार और आयोजन ही जमीनी धरातल पर दिखाई देती है।
राजस्व सृजन का हाल यह है कि राज्य सरकार महात्मा गांधी के शहीद दिवस और होली जैसे पावन पर्वों के दिन भी शराब की दुकानें खोलकर व्यापार चला रही है, क्योंकि इस सरकार के पास वही एक राजस्व का साधन रह गया है।
जब UPA सरकार की मनरेगा योजना प्रभावी थी, तब पिछली बार इसके लिए लगभग ₹4,000 करोड़ का आवंटन था, जिसमें से राज्य सरकार ने सिर्फ़ ₹400 करोड़ ही खर्च किए – बाक़ी बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार से आया।
अब “VB GRAM G” जैसी योजना के नाम पर राज्य सरकार से ₹1,600 करोड़ खर्च करने की उम्मीद की जा रही है। बजट देखकर साफ़ पता चलता है कि राज्य सरकार इतना खर्च करने में सक्षम नहीं है। इस बीच मजदुरो का पलायन का खतरा बडा भयवाह बन चुका है।
इसका सीधा असर ग्रामीण छत्तीसगढ़ में रोज़गार के अवसरों में कमी और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास की रफ़्तार पर पड़ेगा। विकास की गाड़ी रिवर्स में डाल दी गई है और प्रदेश को आर्थिक व मौलिक पतन की ओर धकेला जा रहा है। केंद्र और राज्य की सरकारें मिलकर छत्तीसगढ़ की जनता को सिर्फ झूठे वादों में उलझाने का काम कर रही हैं।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

