विनोद नेताम
छत्तीसगढ़/बालोद/गुरुर/ विशेष रिपोर्ट_
एसडीएम तहसीलदार, आबकारी अधिकारी और बीएमओ की गैरहाजिरी पर गरजे जनप्रतिनिधि जनता के काम में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं।
छत्तीसगढ़ सरकार जहां एक ओर “सुशासन तिहार” के जरिए गांव-गांव तक अपनी योजनाओं और उपलब्धियों का ढोल पीटने में जुटी हुई है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इस सरकारी आयोजन की पोल खोलती नजर आ रही है। बालोद जिले के गुरूर विकासखंड अंतर्गत ग्राम फागुनदाह में आयोजित सुशासन तिहार उस समय सवालों के घेरे में आ गया, जब कार्यक्रम में SDM, तहसीलदार, आबकारी अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के विकासखंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी (BMO) जैसे जिम्मेदार अधिकारी नदारद मिले, जबकि उनके विभाग से जुडे हुए विषयों को लेकर आम जनता इस बार सीधे सीधे जनप्रतिनिधियों को घेरते हूए दिखाई दये। अधिकारियों की गैरमौजूदगी से मंच पर बैठे भाजपा नेताओं का गुस्सा खुलकर सामने आ गया। सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों ने खुले मंच से जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए लापरवाह अधिकारियों को जमकर खरी-खोटी सुनाई।
कार्यक्रम के दौरान संजारी बालोद विधानसभा के पूर्व विधायक प्रीतम साहू ने साफ शब्दों में कहा कि यदि अधिकारी जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेंगे तो सरकार की छवि जनता के बीच लगातार खराब हो रही है। सरकार जनता के लिये है और हमारी सरकार जनता के लिये प्रतिब्द्ध होकर काम करने की इच्छा रखती है। ईसलिए जिम्मेदार अधिकारियो को मंच पर रहना चाहिए। विकासखंड क्षेत्र के अधिकारी और जिला प्रसासन बालोद के जिम्मेदार अधिकारी आगे से ध्यान दे कि सरकार के कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी जनता के लिये तय की गई है। मंच से ही अधिकारियों का नाम लेते हुए चेतावनी दी कि “अब जनता के काम में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
वहीं जनपद उपाध्यक्ष गुरूर दुर्गानंद साहू अपने चिरपरिचित आक्रामक अंदाज में प्रशासनिक अधिकारियों पर बरस पड़े। उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारी “कंबल ओढ़कर घी पीने” में मस्त हैं और सरकार की योजनाओं को पलीता लगाने का काम कर रहे हैं। यदि ऐसा काम चलेगा तो हम बर्दाश्त नहीं करेंगे और इस विषय को लेकर गंभीरता के साथ सरकार से कार्रवाई हेतु हम पत्र भी लिखेंगे।
कार्यक्रम में जिला पंचायत सभापति तेजराज साहू, जनपद अध्यक्ष सुनीता साहू और जिला पंचायत सदस्य चन्द्रिका गंजीर सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भी प्रशासनिक लापरवाही पर नाराजगी जाहिर की। नेताओं का कहना था कि जब सरकार खुद गांव-गांव पहुंचकर जनता की समस्याएं सुनने का दावा कर रही है, तब जिम्मेदार अधिकारी ही कार्यक्रम से गायब रहेंगे तो आखिर “सुशासन” का संदेश जनता तक कैसे पहुंचेगा?
मंच पर मौजूद जिला अपर कलेक्टर चन्द्रकांत कौशिक ने अधिकारियों की अनुपस्थिति को “मजबूरी” बताकर मामले को संभालने की कोशिश की और भविष्य में सुधार का भरोसा दिलाया। लेकिन जिस तरह से सत्ता पक्ष के नेताओं ने मंच से प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया, उसने पूरे आयोजन की गंभीरता और सरकारी तंत्र की अंदरूनी हकीकत को उजागर कर दिया।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या बालोद जिला प्रशासन आने वाले सुशासन तिहार कार्यक्रमों में सचमुच सुधार करेगा, या फिर सरकारी आयोजनों में इसी तरह कुर्सियां खाली और जनता के सवाल अधूरे ही नजर आते रहेंगे?

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

