विनोद नेताम वरिष्ठ पत्रकार
बिहार/विशेष रिपोर्ट
भारत में राष्ट्रीय महिला आयोग है,राज्यों में भी महिला आयोग हैं।
लेकिन सवाल ये है कि जब बेटियों की इज़्ज़त सरेआम रौंदी जा रही है, तब ये संस्थाएं आखिर कर क्या रही हैं?
कभी मणिपुर जलता है,कभी बिहार से दरिंदगी की खबरें आती हैं।
और हर बार सिस्टम की चुप्पी इंसाफ का गला घोंट देती है।
नालंदा (बिहार) में जो हुआ, वो सिर्फ एक अपराध नहीं ये इंसानियत के खिलाफ युद्ध है।
दरिंदे खुले घूम रहे हैं और बेटियां डर में जी रही हैं,अब निगाहें सीधे सुप्रीम कोर्ट पर हैं।क्या न्यायपालिका स्वतः संज्ञान लेगी?
या फिर हमेशा की तरह तब जागेगी जब एक और बेटी की लाश खबर बनेगी?
ये गुस्सा सिर्फ शब्द नहीं है ये उस समाज की चीख है जो अब टूटने की कगार पर है,महिला आयोग खामोश क्यों?
सरकारें जवाबदेह क्यों नहीं?
अपराधियों में कानून का डर क्यों खत्म हो चुका है?
बिहार की डबल-ट्रिपल सरकार और उसका सिस्टम
आज कठघरे में खड़ा है!
“नामर्द सिस्टम” अब और कितनी बेटियों की कुर्बानी चाहता है?
वक्त आ गया है,महिला संगठन सड़कों पर उतरें,
न्याय के लिए लड़ाई सीधे अदालत तक ले जाएं,ये सिर्फ एक घटना नहीं,ये चेतावनी है।
अगर अब भी नहीं जागे, तो हर घर असुरक्षित होगा।
“बेटी बचाओ” सिर्फ नारा नहीं,अब दरिंदों से लड़ने का युद्ध बन चुका है।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

