विनोद नेताम वरिष्ठ पत्रकार
रायपुर | स्पेशल रिपोर्ट _
छत्तीसगढ़ में आम जनता पर महंगाई का ऐसा डबल वार हुआ है, जिसने सियासी गलियारों में भी हलचल मचा दी है। एक तरफ बिजली दरों में बढ़ोतरी की तैयारी, तो दूसरी तरफ नई आबकारी नीति के साथ शराब के दामों में उछाल,दोनों फैसलों ने जनता की जेब पर सीधा हमला कर दिया है।
बिजली: गर्मी से पहले झटका
सूत्रों के अनुसार, राज्य में बिजली दरों में प्रति यूनिट 20 से 25 पैसे तक बढ़ोतरी की तैयारी है। बिजली कंपनियों के हजारों करोड़ के घाटे का हवाला देकर यह बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डालने की योजना है।
गर्मी के मौसम में जब खपत चरम पर होगी, तब यह बढ़ोतरी आम आदमी के बिजली बिल को और ‘करंट’ देगी।
शराब: नई नीति, नई मार
उधर, नई शराब नीति लागू होते ही देशी और विदेशी दोनों तरह की शराब के दामों में ₹20 से ₹300 तक की बढ़ोतरी हो चुकी है।
सरकार का तर्क,राजस्व बढ़ाना और व्यवस्था सुधारना।
लेकिन सवाल यह है कि क्या हर बार जनता की जेब ही ‘रेवेन्यू मशीन’ बनेगी?
राजनीतिक तापमान बढ़ा
विपक्ष ने इसे “जनता पर आर्थिक हमला” बताया
सरकार घाटे और राजस्व का हवाला दे रही
आम आदमी दोहरी मार से परेशान
ताबड़तोड़ असर,बिजली बिल बढ़ेगा,रोजमर्रा खर्च पर दबाव, शराब उपभोक्ताओं की जेब और ढीली, महंगाई का नया रिकॉर्ड बनता नजर आ रहा।
बड़ा सवाल:
जब महंगाई पहले ही चरम पर है, तब क्या ये फैसले जरूरी थे?
या फिर सरकार आसान रास्ता चुनते हुए जनता पर ही बोझ डाल रही है?
गर्मी आने से पहले ही ‘करंट’ और ‘किक’ दोनों का झटका लग चुका है। अब देखना ये है कि यह मुद्दा सियासी तूफान बनेगा या फिर आम जनता की तरह धीरे-धीरे सह लिया जाएगा।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

