विनोद नेताम
छत्तीसगढ़/बालोद/पलारी/विशेष रिपोर्ट_
बालोद जिले के संजारी-बालोद विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत गुरूर विकासखंड की सियासी धरती इन दिनों पूरी तरह चुनावी रंग में रंग चुकी है। ग्राम पंचायत से नगर पंचायत बने पलारी में पहली बार नगरीय निकाय चुनाव होने जा रहा है और इसी के साथ सत्ता की कुर्सी पर बैठने की जंग अब खुलकर जनता के दरबार तक पहुंच चुकी है। गलियों से लेकर चौक-चौराहों तक सिर्फ एक ही चर्चा सुनाई दे रही है“आखिर पलारी का सरताज कौन बनेगा?”
नगर पंचायत पलारी में अध्यक्ष पद को लेकर मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का माना जा रहा है। एक ओर भाजपा समर्थित उम्मीदवार लखन लाल गुरुपंच अपनी पूरी ताकत झोंकते दिखाई दे रहे हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी ने युवा चेहरे यानेश साहू पर दांव खेलते हुए चुनावी मैदान को और भी गरमा दिया है। दोनों दलों के नेता, कार्यकर्ता और समर्थक भीषण गर्मी के बीच घर-घर पहुंचकर जनता से समर्थन मांग रहे हैं। भाजपा अपनी संगठनात्मक ताकत के दम पर चुनावी माहौल साधने में जुटी है, वहीं कांग्रेस भी सत्ता विरोधी माहौल को भुनाने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहती।लेकिन इस चुनाव की असली ताकत जनता के हाथों में है और जनता इस बार सिर्फ भाषण नहीं, जवाब मांग रही है।
जनता पूछ रही है विकास कहां है?
नगर पंचायत बनने के बाद पलारी की तस्वीर बदलने के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, मगर हकीकत यह है कि आज भी नगर की कई बुनियादी समस्याएं जस की तस खड़ी हुई हैं। सड़क,पानी,सफाई,नाली और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर नगरवासी वर्षों से परेशान दिखाई देते रहे हैं। चुनावी मौसम आते ही वही नेता अब विकास का सपना दिखाते नजर आ रहे हैं, जिन पर जनता की समस्याओं से दूरी बनाने के आरोप लगते रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो नगर में अवैध शराब, सट्टा और कई संदिग्ध गतिविधियों को लेकर आम लोगों के भीतर भारी नाराजगी है। इतना ही नहीं, ग्रामीणों के विरोध के बावजूद सरकारी स्कूल के समीप स्थापित राइस मिल का मुद्दा भी अब चुनावी बहस का बड़ा केंद्र बन चुका है। सवाल उठ रहे हैं कि जब जनता आवाज उठा रही थी तब आखिर जिम्मेदार चेहरे खामोश क्यों थे? और अब चुनाव आते ही अचानक जनता की चिंता क्यों सताने लगी?
चुनावी मैदान में वादों की बारिश,लेकिन जनता अब सतर्क
इस बार पलारी की जनता पहले जैसी नहीं दिखाई दे रही। मतदाता अब जाति, पार्टी और खोखले नारों से ऊपर उठकर उम्मीदवारों के पुराने कार्यकाल, व्यवहार और जनहित के मुद्दों पर उनकी भूमिका को तौलते नजर आ रहे हैं। नगर में चर्चा यह भी है कि कई ऐसे चेहरे भी चुनावी मैदान में उतर आए हैं जो वर्षों तक जनता की समस्याओं पर मौन साधे बैठे थे, लेकिन अब खुद को जनता का सबसे बड़ा हितैषी बताने में जुटे हुए हैं।निर्दलीय उम्मीदवार भी इस चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं और समीकरण बिगाड़ने-बनाने की ताकत रखते हैं। ऐसे में मुकाबला सिर्फ भाजपा और कांग्रेस तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि हर प्रत्याशी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में लगा हुआ है।
फैसला अब जनता के हाथों में
नगर पंचायत पलारी का यह चुनाव सिर्फ कुर्सी की लड़ाई नहीं, बल्कि नगर के भविष्य का फैसला भी माना जा रहा है। जनता के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वह ऐसे चेहरे को चुने जो सिर्फ चुनाव के समय दिखाई देता है, या फिर ऐसे उम्मीदवार को जो नगर की समस्याओं के बीच खड़ा नजर आया हो।
अब देखना यह होगा कि पलारी की जनता किसके सिर पर जीत का ताज सजाती है और किसे सत्ता की चौखट से बाहर का रास्ता दिखाती है। लेकिन इतना तय है कि इस बार पलारी का चुनाव बेहद दिलचस्प,तीखा और राजनीतिक रूप से ऐतिहासिक होने वाला है।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

