28 मई 2026 की तगडे सुबह  आदीवासी समाज पूरे लाव लश्कर के साथ जिला कलेक्ट्रेट का करेंगे घेराव।

विनोद नेताम
छत्तीसगढ़/बालोद/लोहारा/ विशेष रिपोर्ट _
सर्व आदीवासी समाज जिला बालोद छत्तीसगढ़ ने दिनांक 28/05/2026 दिन गुरूवार के दिन तड़के सुबह से पूरे लाव लश्कर के साथ जिला कलेक्ट्रेट का घेराव करने का फैसला लिया है। सर्व आदीवासी समाज जिला बालोद छत्तीसगढ़ की माने तो जिला कलेक्टर कार्यलय का घेराव करने का मकसद दिनांक 17 मई 2026 से लेकर 15 जून 2026 तक चलने वाला जामड़ी पाटेश्वर धाम के भीतर में आयोजित बाबा बालक दास का वह कार्यक्रम है,जिसे वह स्वंय अपने मुख से समाजिक व धार्मिक चेतना का नाम देकर छत्तीसगढ़ के समाज प्रमुखों के समक्ष मानवता और इंसानियत का महा संगम बता रहा है,जबकि यही बाबा बालक दास आज से कुछ बरस पहले इस क्षेत्र में अपना कब्जा बनाने के उद्देश्य से आदीवासी समाज के द्वारा की गई रूढ़िवादी प्रथा को निष्ठा नाबूत करते हुए निर्दोष और निहत्थे आदिवासियों पर जानलेवा हमला करवाया था। सोंचने वाली बात यह भी एक है कि गरीब निहत्थे आदीवासीयों पर एक संत का चोला पहनने वाला बाबा ने हमला क्यों करवाया,इस बता दे कि तूएगोंदी में ग्रामीणों की आस्था का क्रेंन्द्र जल कैना जिसे छत्तीसगढ़ के स्थानीय भाषा में सत बहनी कहा जाता है उसे तक बाबा ने अधर्म का संज्ञा लगाकर तहस नहस करते हुए जबरन असंवैधानिक तरिके से पांचवी अनूसूची क्षेत्र में निर्माण कार्य करवाया। सोंचिए जो बाबा संत संत और त्यागी होता है क्या वह ऐसे दुर्दांत कृत्य को कभी कर सकता है क्या? क्योंकि संत ज्ञानी और त्यागी तो साक्षात ईश्वर के सामान होता है उसे ना तो जमीन का लोभ हो सकता है और ना ही किसी जमीन के लिये निर्दोष आदिवासी पर गुंडों के जरिये गुंडागर्दी करने की जरूरत पड़ सकती है। बावजूद इसके जामड़ी पाटेश्वर धाम के भीतर में रहने वाला एक तथाकथित संत ने यह धर्म के आड़ में कर दिखाया और गरीब निहत्थे आदिवासियों को दौड़ा दौड़ा कर मरवाया फिर उनकी हक और अधिकार के क्षेत्र में अपना डेरा डालकर बैठ गये। सनद रहे जामड़ी पाटेश्वर धाम संविधान के अनुरूप पांचवी अनुसूची क्षेत्र के दायरे में आता है जहां पर ग्राम सभा की अनुमति किसी भी कार्य के लिए अनिवार्य माना गया है। इस बिच देश के कानून और संविधान के मुताबिक पांचवी अनुसूचि क्षेत्र में यदि कानून और संविधान के मुताबिक बनाई हुई नियमों की अनदेखी होती है तो उसका जवावदेह शासन और प्रशासन को माना जाना चाहिए। बाबा बालकदास का सियासी जमात के रसूखदार नेताओं के साथ बेहतरीन संबध है जिसके चलते नियम और कानून को दरकिनार करते हुए जिला प्रशासन बालोद के जिम्मेदार और जवाबदेह प्रशानिक अधिकारी भी बाबा के हर काम में साथ देते हुए दिखाई देते है। वंही बाबा बालकदास के आंतक से पीड़ित गरीब आदिवासियों की ओर झांकने वाला कोई नहीं है। जिसके चलते बीते कई सालों से तूएगोंदी से ताल्लुक रखने वाले लगभग एक दर्जन गांव बाबा के चलते कोर्ट और कचहरी का चक्कर लगा रहे हैं। वंही बाबा इनके गांव में आकर खुद उनके संरक्षण हेतु बनाई गई हुई कानून को तहस-नहस कर उनके जल जंगल और जमीन पर कुंडली मारकर बैठे हुए हैं। हालांकि पूर्व में एक जिम्मेदार वन मंडल महिला अधिकारी ने बाबा की बोलती बंद कर दिया था, लेकिन बाबा की पहुंच और ताकत ने उक्त महिला अधिकारी को बालोद जिला मुख्यालय से रातोरात ट्रांसफर करवा दिया था, तथा जामड़ी पाटेश्वर धाम में नया निर्माण पर रोक भी लगाया गया है। सवाल यह भी बार-बार बालोद जिला की सरजमी से उड़ता है कि क्या शासन और प्रशासन के रहते हुए संविधान के अनुरूप बनाए गए नियम और कानून को एक झोलाछाप तूतुर बाबा धर्म के आड़ में तहस-नस कर सकते हैं

यदि नहीं कर सकते है,तो बाबा जी का जामडी पाटेश्वर धाम क्या घंटी बजाते बन गया मतलब सीधा और स्पष्ट है,कि बगैर संरक्षण के बाबा बाबा गिरी का एक श्लोक भी नहीं पढ सकता है और वैसे भी तूएगोंदी की पवन धरा धरती के असली मालिक माने जाने वाले आदिवासियों की सरजमी है, किंतु संरक्षण धारी बाबा के लगातार हो रहे अमानवियकृत के चलते आदिवासी समाज बार-बार नहीं बल्कि लगातार आहत हो रहा है और इसी के चलते आदिवासी समाज ने फैसला किया है कि बाबा की दादागिरी अब नहीं सहेंगे।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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