विनोद नेताम

छत्तीसगढ़/सीतापुर :- सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर आकांक्षा टोप्पो की गिरफ़्तारी लोकतंत्र पर हमला।छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर आकांक्षा टोप्पो की गिरफ़्तारी ने राज्य में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आकांक्षा टोप्पो लंबे समय से जनभावनाओं से जुड़े मुद्दों को बिना किसी राजनीतिक पक्षपात के उठाती रही हैं और सत्ता व विपक्ष-दोनों से समान रूप से जवाब मांगती आई हैं।

हाल ही में उन्होंने महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा सीतापुर विधायक से जुड़े उस मामले पर सवाल उठाए थे,जिसमें एक दिव्यांग परिवार को उनकी ज़मीन से बेदखल किए जाने का आरोप है। जनहित से जुड़े इस संवेदनशील प्रश्न पर जवाब देने के बजाय, प्रशासन ने आलोचना की आवाज़ को दबाने का रास्ता चुना और उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया।
यह घटना स्पष्ट करती है कि राज्य में असहमति और सवाल पूछने को अपराध की तरह देखा जा रहा है। आलोचना का सामना करने के बजाय दमन की नीति अपनाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।

सवाल उठाना नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, न कि कोई अपराध।
हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि
• अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दमन स्वीकार्य नहीं है।
• सत्ता में बैठे लोगों से जवाबदेही मांगना जनतंत्र की आत्मा है।
• सवालों के बदले हथकड़ी देना फासीवादी सोच को दर्शाता है।
अतः लोग यह मांग कर रहे हैं कि
1. आकांक्षा टोप्पो को तत्काल रिहा किया जाए।
2. दिव्यांग परिवार को न्याय दिलाने के लिए निष्पक्ष जांच हो।
3. असहमति की आवाज़ों को दबाने की प्रवृत्ति पर रोक लगे।
देश संविधान से चलता है, किसी व्यक्ति या सरकार के अहंकार से नहीं।
लोकतंत्र में सवाल बंद होंगे तो जवाबदेही भी खत्म हो जाएगी।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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