विनोद नेताम
छत्तीसगढ़/रायगढ़:-
रायगढ़ जिले के ग्राम लिबरा स्थित सीएचपी चौक में शनिवार को कोयला परियोजना के विरोध में चल रहा धरना हिंसक हो गया। उग्र भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया, जिसमें एसडीओपी अनिल विश्वकर्मा, तमनार थाना प्रभारी कमला पुसाम सहित कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।हालात बिगड़ने पर भीड़ ने पुलिस बस, जीप और एंबुलेंस को आग के हवाले कर दिया तथा कई शासकीय वाहनों को क्षतिग्रस्त किया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने जिंदल के कोल हैंडलिंग प्लांट में घुसकर कन्वेयर बेल्ट, दो ट्रैक्टर व अन्य वाहनों को जला दिया और कार्यालय में तोड़फोड़ की। मौके पर पहुंचे विधायक, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के समझाने के प्रयास के बावजूद भीड़ ने दोबारा पथराव और आगजनी की। स्थिति फिलहाल नियंत्रण में बताई गई है।

जल जंगल और जमीन की लडाई में स्थानीय नागरिकों के साथ आखिरकार कौन खडा है?
छत्तीसगढ़ के रायगढ जिला में तमनार ब्लॉक के धौराभाठा में घटित घटनाक्रम केवल एक कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की मौजूदा नीतियों और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्न है। जिंदल उद्योग को आवंटित गारे-पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक में भू-अधिग्रहण और प्रस्तावित उत्खनन के विरोध में ग्रामीण सड़क पर उतरने को मजबूर हैं, और जवाब में संवाद की जगह बल प्रयोग सामने आता है। सीएचपी चौक पर हुआ टकराव, पथराव, वाहनों में आगजनी और पुलिसकर्मियों के घायल होने की घटनाएँ बताती हैं कि हालात कितने बिगड़ चुके हैं।
सवाल यह है कि क्या विकास का रास्ता जन-सहमति के बिना तय किया जा रहा है।क्या आदिवासी-ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी संसाधनों पर पहले कॉरपोरेट का हक माना जा रहा है।छत्तीसगढ़ में यदि लोकतांत्रिक संवाद की जगह टकराव ले रहा है, तो यह राज्य की सेहत के लिए खतरनाक संकेत है।विकास और अधिकार के बीच संतुलन खोना ही असली संकट है।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

