
विनोद नेताम
छत्तीसगढ़ :- जिसके कंधों में अवैध शराब बोलने से रोकने की जिम्मेदारी हो वो खुद उनसे खरीद शराब ली रहे हो तो, आसानी से समझा जा सकता है अवैध शराब का व्यापार किस हद्द तक अपनी जड़ जमाया हुआ है, दुर्ग रेलवे स्टेशन के पीछे झोपड़ पत्ती से शराब लेता पुलिस कर्मी।

छत्तीसगढ़ के भीतर में शराब का चलन आम हो चला है और इसका सबसे बडा कारण है सरकार की चुप्पी। अब सरकार क्यों चुप्पी साधे हुये बैठी है यह एक बडा सवाल है,जबकि सरकार खुद यह मानकर चलती है, कि शराब नशे का जड़ है और नशा नाश का मूल वजह है। बावजूद इसके शराब के चलते समाज के अंदर गंदगी फैलती है। अपराध बढता है। परिवार टुटकर बिखर जाता है ऊपर से कोर्ट कचरी के चक्कर में जेब का पैसा अलग चला जाता है। यहां तक लोगों पर कर्ज का पहाड चढ जाता है। वंही समाज के भीतर में भी नाम खराब होता है। अब जब शराब पीने के चलते इतना सब लोगों को झेलना पड़ता है तो फिर शराब परोसने वाले लोग कैसे मजे में रहते है।
हर घर के चूल्हा पाट में गिरे से गिरे हालत में कम से कम तीन पौव्वा
गौरतलब हो कि छत्तीसगढ़ राज्य की पावन धरा की पहचान धान और किसान से हो कर गुजरती हुई सदियों से चली आ रही है, लेकिन विगत कुछ वर्षो के भीतर में लगातार यह देखा जा रहा है कि सत्ताशिर्ष पर काबिज रहने वाली प्रदेश सरकारे अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में पूरे प्रदेश भर के अंदर में शराबखोरी को बढावा दे रही है, हालांकि किसी भी सरकार को सभ्य समाज के भीतर में नशाखोरी को बढावा देने का हक और अधिकार नही मिलना चाहिए, लेकिन छत्तीसगढ़ के भीतर में नशाखोरी को बढावा देने हेतू सरकार जिस अधिकार का इस्तेमाल कर रही है वह भी एक समाजिक चिंतन का विषय माना जा सकता है।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

