करोड़ों रूपये के धान को फोकला सहित कुतरवाने के बाद साय सरकार की एक और उपलब्धि, इस बरस नही बेंच पायेंगे धान सूबे के ज्यादातर किसान।

विनोद नेताम

छत्तीसगढ़/बालोद/गुरुर_

बालोद जिला के गुण्डदेही ब्लाक अंतर्गत बेलौदी धान खरीदी केन्द्र में ग्राम भुसरेंगा निवासी नेमसिंह ठाकुर का लगभग डेढ़ एकड़ खेत का धान बिक नहीं पाया है।

इस पर ग्राम पंचायत भुसरेंगा में निवास करने वाले माटी पुत्र अन्नदाता किसान नेमसिंह ठाकुर की माने तो धान खरीदी केन्द्र में पदस्थ किसी कर्मचारी के झूठे बहकावे में आकर उन्होंने इस बसर अपनी मेहनत और पसीने की कमाई को बेच नही पाया है।

धान के कटोरा के रूप में विख्यात छत्तीसगढ़ की पहचान धान और किसान के बीना ना सिर्फ अधूरा बल्कि अकल्पनीय माना जा सकता है। शायद इसलिये सूबे की सियासत भी धान और किसान के आसपास ही टिकी हुई दिखाई देती है,किंन्तु हैरत की बात यह भी एक है कि भारतीय जनता पार्टी की सुशासन रूपी सुदर्शनचक्र धारी मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ की डबल इंजन सरकार में क्या चल रहा है? एक तरफ जंहा पर सत्ताधारी राजनितिक दल के नेता धान खरीदी के कार्य से खुद संतुष्ट नहीं है, ऊपर से सूबे के भीतर मौजूद माटीपुत्र अन्नदाता किसान आज भी अपनी मेहनत और पसीने से कमाये हुये धान के एक एक दाना को बेंचने के लिये तरस रहे है। बावजूद इसके सरकार का रवैया किसानों के प्रति क्या है ‘यह समझ से परे बताया जा रहा है,अब क्यूँ और कैसे यह बताने की आवश्यकता नहीं है। चूंकि समय आने पर धमतरी जिले के कुरूद विधानसभा क्षेत्र के भीतर मौजूद लोकप्रिय भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और विधायक अजय चंन्द्राकर जी पानी पीला पीला कर बता ही देंगे। बहरहाल सोसल मिडिया पर सारंगगढ़ जिले के कोई ओहदेदार अधिकारी का विडियो कालिंग रिकॉर्ड वायरल हुआ है जिसमें उक्त ओहदेदार अधिकारी के द्वारा शाखा प्रबंधको को किसानों का टोकन नहीं काटने की नसीहत देते हुए यह कह रहे हैं कि उनकी नौकरी चली जाएगी! जरा सोचिए एक तरफ समूचे छत्तीसगढ़ के भीतर में महिनों से जारी धान खरीदी का कार्य अंतिम दिशा की ओर कदम बढा चुकी है। इस बीच सरकार के मंत्री तक कह चुके है,कि सूबे के भीतर में समय को ध्यान में रखते हुये धान खरीदी के कार्य को बंद कर देना चाहिए।अब ऐसे में सूबे के भीतर मौजूद ज्यादातर अन्नदाता माटीपुत्र किसान टोकन की समस्या से लेकर कम्युंटर आपरेटरों की हड़ताल सहित अन्य वजहों के चलते इस बरस अपने मेहनत और पसीने से उगाये हुए धान को भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार के रहते हुये बेंच पाने में असफल साबित हुये है। किसानों की माने तो धान नहीं बेंच पाने के चलते उनके कई सपने और अरमान अधूरे रह गए है, लेकिन कोई बात नही कम से कम हमारे अधूरे सपनों के चलते छत्तीसगढ़ सरकार की गांरटी तो पुरी हो जायेगी।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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