धान नहीं बिका अब कैसे मिलेगा धन, किंतु आम बजट पर बीजेपी नेता देंगे ताबड़तोड़ भाषण।

विनोद नेताम वरिष्ठ पत्रकार(छत्तीसगढ़)
छत्तीसगढ़/बालोद/गुरुर/ विशेष रिपोर्ट_
“बालोद की सियासत में ‘धान’ को लेकर एक नया दास्तान की शुरूआत हो चुकी है”
सत्ता पक्ष से संजारी बालोद विधानसभा की पूर्व विधायक कुमारी मदन साहू भी नहीं बेंच पाई अपने खेतों में उपजाई हुई कई क्विंटल धान, जबकि सत्ताधारी पार्टी ने छत्तीसगढ़ के सत्ता पर काबिज होने से पहले किसानों की एक एक दाना को खरीदने का गांरटी दिया था। ऐसे में कुर्सी टिका कर खुद सोसायटी के चबूतरे पर सत्ताधारी पार्टी धान खरीदी की एक पूर्व विधायक ने भी अन्य बांकी किसानों की तरह रात भर दिया धरना।बावजूद इसके वह भी सही तरिके से नही पूछ पा रही है,अपने ही पार्टी की सरकार से किसानों की समस्या पर एक भी सवाल। बस मायुसी और बेबसी के साथ खुद से पूछ रही है सवाल कि आखिरकार अन्नदाता माटीपुत्र मेहनतकश किसान होने के अलावा उनका गुनाह क्या है?
बालोद धान के कटोरा के रूप में प्रसिद्धि हांसिल करने वाला छत्तीसगढ़ राज्य की पहचान निश्चित रूप से धान और किसान से होकर गुजरती है।इसलिए यह माना जा सकता है कि यंहा की सियासत भी इंन्ही मुख्य दो बिंन्दु टीकी हुई रहती है।

बता दे कि इस बख्त बालोद जिले के भीतर मौजूद ज्यादातर धान खरीदी केंद्रों से आई तस्वीरों ने पूरे प्रदेश का ध्यान खींच लिया है। जिले के ज्यादातर धान खरीदी केन्द्रों में किसानों का धरना से लेकर हंगामा आंय बांय और सांय सांय तरीके से अब भी जारी है। गौरतलब हो कि छत्तीसगढ़ राज्य के भीतर में रहने वाले लाखों किसान इस बरस धान नहीं बेंच पाये है।

हैरत की बात यह है कि इस कड़ी में कुमारी बाई साहू पति मदन साहू पूर्व विधायक संजारी बालोद का भी जुड़ गया है। हालांकि रकबा समर्पण का दंश बहुत सारे भारतीय जनता पार्टी के अन्नदाता किसान नेताओं को भी लगा है,लेकिन उनके द्वारा इस तरह से धरना प्रदर्शन करने की हजमत या फिर जोखिम अबतक नहीं उठाया गया है। जबकि सत्ताधारी पार्टी के नेताओं को किसानों की भंयकर समस्या पर चुप्पी नहीं साधना चाहिए, क्योंकि आगे चलकर यह समस्या उनके सरकार के लिये गले का फांस बन सकती है। इस बीच बता दे कि अरमरीकला धान खरीदी केंद्र में पूर्व विधायक को ‘टोकन’ के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा।

278 क्विंटल धान बेचने की जद्दोजहद में पूर्व विधायक अपने बेटे के साथ देर रात तक केंद्र में बैठी रहीं।

कलेक्टर से आस, व्यवस्था से निराशा
वरिष्ठ भाजपा नेत्री कुमारी बाई साहू के पुत्र नरेश मदन साहू, जो खुद जनपद पंचायत गुरूर में कृषि विभाग के सभापति हैं, उनकी बेचैनी साफ झलक रही थी। उन्होंने बताया कि अब तक उनका टोकन नहीं कट पाया है। “इतना सारा धान (278 क्विंटल) हम कहां ले जाएंगे? थोड़ा बहुत होता तो छोड़ भी देते, लेकिन अब केवल कलेक्टर ही हमारा धान खरीद सकते हैं।” उन्होंने दो टूक कहा कि जब तक समाधान नहीं होगा, वे वहां से नहीं उठेंगे।

विधायक संगीता सिन्हा का सरकार की अव्यवस्था पर तीखा प्रहार

जब हम लड़ रहे थे, तब कहां थे भाजपाई?’
इस पूरे मामले में सियासत की एंट्री तब हुई जब संजारी बालोद की वर्तमान कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने मोर्चा संभाला। उन्होंने पूर्व विधायक की इस स्थिति पर सहानुभूति जताने के बजाय तीखा हमला बोला। सिन्हा ने तंज कसते हुए कहा, “जब हम किसानों के हक के लिए सड़कों पर लाठियां खा रहे थे और संघर्ष कर रहे थे, तब भाजपा का एक भी नेता नजर नहीं आया।

आज जब खुद का धान फंस गया है, तो ये सहानुभूति बटोरने के लिए केंद्र में जाकर बैठ गए हैं।”
गंभीर सवाल: आम किसान का क्या होगा?
जिले में धान खरीदी को लेकर पहले ही घमासान मचा हुआ है। ‘रकबा समर्पण’ और तकनीकी खामियों के चलते सैकड़ों किसान अपनी उपज नहीं बेच पाए हैं। कांग्रेस विधायक ने सवाल उठाया कि आखिर इन किसानों का जिम्मेदार कौन है?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि एक पूर्व विधायक और सत्ता पक्ष के जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को मंडी में रात गुजारनी पड़ रही है, तो आम किसान की सुनवाई किस स्तर पर हो रही होगी?

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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