विनोद नेताम की कलम से (वरिष्ठ पत्रकार)
विशेष रिपोर्ट_
आम जनमानस के अंदर में पुलिस महकमा को लेकर एक दिलचस्प धारणा कुट कुट कर व्यापत है कि पुलिस वाले वर्दीधारी भाई लोग अक्सर अपना कमर बेल्ट उतारकर थाने के भीतर में आरोपियों को बजाते हैं, लेकिन इस वीडियो से पता चलता है कि पुलिस के पास हर थाने के भीतर में एक स्पेशल बेल्ट होता है और यह बेल्ट पुरी तरह से चमड़ा से बना हुआ रहता है एवं इसमें पकड़ने के लिए हत्था भी होता है।
जिसे पकड़ कर थाने के भीतर में अक्सर पुलिस वाले वर्दीधारी भाई लोग आरोपियों की बकायदा आवभगत किया करते है। बहरहाल थाने के भीतर में इस पट्टे का इस्तेमाल एक पुलिस वाला किसी व्यक्ति पर करते हुए दिखाई दे रहा है।
विडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक पुलिस वाला युवक को पकड कर रखा है और दूसरे पुलिस वाला उक्त व्यक्ति को पीटते हुये नजर आ रहा है।
दरअसल यह वीडियो पुलिस सुधारों की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है।
आपने जिस ‘चमड़े के पट्टे’ (जिसे बोलचाल में ‘पट्टा’ भी कहा जाता है) का जिक्र किया है, वह किसी भी आधिकारिक पुलिस मैनुअल का हिस्सा नहीं है। कानून स्पष्ट है: हिरासत में हिंसा (Custodial Violence) एक दंडनीय अपराध है।
सुप्रीम कोर्ट के डी. के. बासू फैसले के अनुसार, किसी भी आरोपी के साथ अमानवीय व्यवहार नहीं किया जा सकता। पैरों के तलवों पर मारना केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक प्रताड़ना भी है। यह वीडियो उस ‘वर्दी’ की छवि धूमिल करता है जिसका काम नागरिकों की रक्षा करना है, न कि कानून हाथ में लेकर न्याय करना।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

