सितम की तेग से गर्दन वफा सिआरों की
कटी है बर-सरे मैदॉं मगर झुकी तो नहीं।

विनोद नेताम वरिष्ठ पत्रकार

विशेष रिपोर्ट_

“अब युद्ध के कोई नियम नहीं बचे मध्य पूर्व जल रहा है,और दुनिया खामोश है”
कभी युद्ध सूर्यास्त के साथ थम जाता था। सेनाएँ रुकती थीं। तलवारें म्यान में चली जाती थीं।
लेकिन अब?अब असली युद्ध सूर्यास्त के बाद शुरू होता है।
अब मिसाइलें रात के अंधेरे में शहरों को चीरती हैं।
अब सोते हुए बच्चे भी “लक्ष्य” बन जाते हैं।
बमों को फर्क नहीं पड़ता कि सामने सैनिक है या मासूम नागरिक।मिसाइलें यह नहीं पूछतीं कि मरने वाला गुनहगार था या बेगुनाह,उनका सिर्फ एक धर्म है- विनाश
आज मध्य पूर्व उसी आग में जल रहा है,अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान पर घातक हमले शुरू कर दिए हैं। जवाब में ईरान ने भी सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दाग दी हैं। पूरा क्षेत्र बारूद के ढेर पर बैठा है।

सूत्रों के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामनेई के बारे में गंभीर खबरें सामने आ रही हैं, कहा जा रहा है कि वे इस दुनिया में नहीं रहे। अगर यह सच है,तो यह सिर्फ एक नेता की मौत नहीं, यह मध्य पूर्व की राजनीति का भूकंप है।
इतिहास गवाह है,कुछ लोग पद से नहीं, अपने रुख से याद किए जाते हैं।कहा जा रहा है कि ख़ामनेई अंत तक अपने देश में डटे रहे।
न भागे।न झुके।न समझौता किया।
इधर एक और सवाल खड़ा हो रहा है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में इज़राइल दौरे से लौटे हैं।और उनकी वापसी के तुरंत बाद यह युद्ध भड़क उठा। क्या यह महज संयोग है? या वैश्विक कूटनीति के शतरंज पर कोई बड़ा खेल चल रहा है?
भारत और ईरान के रिश्ते सदियों पुराने रहे हैं, व्यापार, संस्कृति और रणनीतिक सहयोग पर आधारित। ऐसे में यह संघर्ष भारत की विदेश नीति के लिए भी अग्निपरीक्षा साबित हो सकता है।लेकिन सबसे बड़ा सवाल वही है :-
युद्ध में जीतता कौन है?जो मिसाइल चलाता है?
या जो मारा जाता है?क्योंकि सच्चाई यह है कि युद्ध में अंततः हार मानवता की ही होती है।

घर उजड़ते हैं,पीढ़ियाँ तबाह होती हैं।
और इतिहास के पन्नों पर सिर्फ खून के धब्बे बचते हैं।
आज दुनिया फिर उसी मोड़ पर खड़ी है,जहाँ ताकत का प्रदर्शन हो रहा है,लेकिन इंसानियत दम तोड़ रही है।युद्ध कभी समाधान नहीं रहा,और शायद कभी होगा भी नहीं।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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