विनोद नेताम (वरिष्ठ पत्रकार)
छत्तीसगढ़/सुरजपुर/विशेष रिपोर्ट _
सुरजपुर जिले के देवनगर बीट अंतर्गत चम्पकनगर नर्सरी क्षेत्र में वन विभाग के एक वर्दीधारी आरक्षक के साथ हुई मारपीट और जबरन डांस करवाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला गंभीर हो गया है, घटना ने न केवल विभागीय अनुशासन बल्कि कानून-व्यवस्था और भीड़तंत्र की प्रवृत्ति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार,देवनगर बीट में पदस्थ वन आरक्षक सुखदेव पैकरा कथित रूप से एक युवती के साथ नर्सरी क्षेत्र में देखे गए, इसी दौरान कुछ स्थानीय युवकों ने उन्हें घेर लिया, वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा है कि कुछ युवक वर्दीधारी कर्मचारी के साथ दुर्व्यवहार करते हुए नजर आ रहे हैं। आरोप है कि उन्हें बेल्ट से पीटा गया,अपमानित किया गया और जबरन डांस करवाया गया, घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया,जिससे मामला सार्वजनिक हो गया,वीडियो सामने आने के बाद पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है।
प्रेम प्रसंग की चर्चा,लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं
स्थानीय स्तर पर घटना को लेकर प्रेम प्रसंग की चर्चाएं भी सामने आई हैं,हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है,यह भी स्पष्ट नहीं है कि संबंधित युवती की भूमिका क्या थी और क्या वह इस कथित घटनाक्रम में सहमति से मौजूद थी या किसी दबाव की स्थिति में,ऐसे मामलों में तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है,लेकिन फिलहाल सोशल मीडिया पर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
विभाग की कार्रवाई : कारण बताओ नोटिस और मुख्यालय अटैच
मामले के वायरल होते ही वन विभाग हरकत में आया,संबंधित प्रकरण में डीएफओ दुलेश्वर साहू ने वन आरक्षक सुखदेव पैकरा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है,नोटिस में यह पूछा गया है कि घटना की जानकारी विभाग को समय पर क्यों नहीं दी गई? ऑन ड्यूटी रहते हुए ऐसी स्थिति कैसे बनी? क्या उन्होंने अपने कर्तव्य और आचरण नियमों का उल्लंघन किया? साथ ही, उन्हें तत्काल प्रभाव से देवनगर बीट से हटाकर मुख्यालय में अटैच कर दिया गया है। विभागीय जांच प्रारंभ कर दी गई है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
सबसे बड़ा सवालः कानून हाथ में लेने का अधिकार किसे?
घटना का दूसरा और अधिक गंभीर पहलू यह है कि कुछ युवकों ने कथित रूप से बेल्ट से मारपीट की, सार्वजनिक रूप से अपमानित किया और वीडियो बनाकर वायरल किया, कानूनी दृष्टिकोण से देखें तो किसी भी व्यक्ति के साथ मारपीट करना दंडनीय अपराध है, वर्दीधारी कर्मचारी के साथ सार्वजनिक दुर्व्यवहार गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, जबरन वीडियो बनाना और वायरल करना भी आईटी अधिनियम और अन्य धाराओं के अंतर्गत अपराध हो सकता है, ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि वन आरक्षक का आचरण संदिग्ध था भी, तो क्या कुछ युवकों को उन्हें बेल्ट से पीटने और अपमानित करने का अधिकार था?
अब तक एफआईआर क्यों नहीं?
घटना को लगभग 9 दिन बीत जाने के बावजूद किसी भी पक्ष द्वारा थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है,यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है,क्या दोनों पक्षों के बीच समझौते की कोशिश चल रही है? क्या दबाव की स्थिति है? क्या पुलिस स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगी? वायरल वीडियो अपने आप में प्राथमिक साक्ष्य माना जा सकता है। ऐसे में पुलिस चाहे तो स्वयं संज्ञान लेकर जांच प्रारंभ कर सकती है।
प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर नजर
फिलहाल वन विभाग ने अपने स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है,यदि आरोपियों की पहचान हो चुकी है,तो उनके खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करना आवश्यक माना जा रहा है,इस घटना ने तीन प्रमुख प्रश्न खड़े किए हैं,क्या आरक्षक ने सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन किया? क्या युवकों ने कानून हाथ में लेकर गंभीर अपराध किया?क्या पुलिस निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई करेगी?
व्यापक संदेशः भीड़तंत्र बनाम कानून व्यवस्था…
देवनगर बीट की यह घटना केवल एक वायरल वीडियो का मामला नहीं है,यह उस बढ़ती प्रवृत्ति का संकेत भी है,जहां लोग स्वयं न्याय करने की कोशिश में कानून हाथ में ले लेते हैं,यदि किसी सरकारी कर्मचारी की गलती है तो विभागीय जांच और कानूनी प्रक्रिया मौजूद है। लेकिन सार्वजनिक रूप से बेल्ट से पिटाई और अपमान यह कानून के शासन के खिलाफ है।
जांच जारी,कार्रवाई का इंतजार
वन विभाग द्वारा विभागीय जांच प्रारंभ कर दी गई है और संबंधित आरक्षक को मुख्यालय अटैच किया गया है,अब निगाहें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं कि वह वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान कर क्या ठोस कदम उठाती है, देवनगर बीट की यह घटना आने वाले दिनों में प्रशासनिक सख्ती और कानून व्यवस्था की परीक्षा बन सकती है, जांच जारी है,और पूरे जिले की नजर इस मामले में होने वाली अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

