विनोद नेताम

छत्तीसगढ़/ बालोद/ गुरुर/ विशेष रिपोर्ट_
नगर पंचायत पलारी का चुनावी रण अब पूरी तरह सज चुका है। भाजपा और कांग्रेस दोनों दल जनता के बीच अपने-अपने पक्ष को मजबूती से रखने में जुटे हैं। लेकिन इस बार चुनाव केवल वादों और नारों का नहीं, बल्कि जनता के दर्द, नाराजगी और उम्मीदों का भी माना जा रहा है।
कांग्रेस समर्थकों का दावा है कि केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद आम जनता को महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट से राहत नहीं मिल पाई है। बिजली बिल,खाद, डीजल, पेट्रोल और रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। किसानों के सामने खाद की उपलब्धता और खेती की बढ़ती लागत बड़ी चिंता बनी हुई है।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि जब केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार थी और छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार,तब गौठान योजना,गोबर खरीदी, महिला सशक्तिकरण और किसानों को धान का बेहतर मूल्य दिलाने जैसी योजनाओं ने गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी थी। कांग्रेस समर्थक इन योजनाओं को आज भी ग्रामीण विकास का मॉडल बता रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर भाजपा सरकार के विकास के दावों पर सवाल भी उठ रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि ग्राम पंचायतों में विकास कार्य ठप पड़े हैं, सरपंच संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं का असर जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा।

ऐसे में जनता के बीच यह सवाल लगातार गूंज रहा है कि क्या विकास की गंगा वास्तव में बह रही है या केवल भाषणों और विज्ञापनों तक सीमित है?
पलारी में बुलडोजर कार्रवाई का मुद्दा भी चुनावी बहस के केंद्र में है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि वर्षों से बसे गरीब परिवारों के आशियानों पर कार्रवाई कर उन्हें संकट में डाल दिया गया। यह मुद्दा अब संवेदनशील राजनीतिक विषय बन चुका है और चुनावी माहौल को प्रभावित करता दिखाई दे रहा है।
महिलाओं की सुरक्षा, बढ़ते अपराध, अवैध शराब, नशे के कारोबार, भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी जैसे मुद्दों को लेकर भी विपक्ष भाजपा सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। कांग्रेस का कहना है कि जनता अब केवल वादों पर नहीं बल्कि काम और परिणाम पर वोट देगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार पलारी का चुनाव पारंपरिक समीकरणों से अलग हो सकता है। जनता पहले से अधिक जागरूक और सजग नजर आ रही है। मतदाता अपने अनुभव, स्थानीय समस्याओं और विकास के मुद्दों को ध्यान में रखकर निर्णय लेने के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पलारी की जनता बदलाव का झंडा बुलंद करेगी या भाजपा पर फिर से भरोसा जताएगी?
फिलहाल चुनावी शोर के बीच एक बात साफ है,पलारी की जनता इस बार खामोशी से सब देख रही है और उसका फैसला ही तय करेगा कि सत्ता का ऊंट किस करवट बैठेगा।
नोट: यह राजनीतिक विमर्श और विभिन्न पक्षों द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों पर आधारित लेखन है। चुनावी दावों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अंतिम निर्णय मतदाताओं का होता है।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

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