विनोद नेताम वरिष्ठ पत्रकार

छत्तीसगढ़/बीजापुर/विशेष रिपोर्ट_

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से सामने आई एक खबर ने सरकारी व्यवस्था, शिक्षा तंत्र और जिम्मेदार अधिकारियों की संवेदनशीलता,तीनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

जिले के एक सरकारी आवासीय विद्यालय की तीन छात्राओं के गर्भवती होने का मामला सामने आया है।हैरानी की बात यह है कि इस सच्चाई का खुलासा तब हुआ, जब दो छात्राएं 12वीं की परीक्षा देने पहुंचीं।
अब सवाल यह है कि आखिर इतने महीनों तक स्कूल प्रबंधन, छात्रावास के कर्मचारी, शिक्षा विभाग और प्रशासन,सबकी आंखों पर कैसी पट्टी बंधी हुई थी?
आवासीय विद्यालयों को इसलिए बनाया जाता है कि दूर-दराज के इलाकों के बच्चे सुरक्षित माहौल में पढ़ सकें। खासकर आदिवासी अंचलों के बच्चों के लिए ये स्कूल उम्मीद का दरवाजा माने जाते हैं। लेकिन जब उसी छात्रावास से ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, तो यह केवल एक स्कूल की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की शर्मनाक नाकामी बन जाती है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब छात्राओं के गर्भवती होने की जानकारी मिली, तब जिम्मेदारी तय करने के बजाय उन्हें चुपचाप स्कूल से बाहर कर दिया गया। सवाल यह है कि क्या यही सरकारी “समाधान” है?
घटना दबाओ… छात्राओं को निकालो… और फाइल बंद कर दो?
राजनीतिक भाषणों में बेटियों की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे नारे मंचों पर खूब गूंजते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि जिन छात्रावासों में बेटियों को सुरक्षित रखना था, वहीं उनकी सुरक्षा सबसे ज्यादा संदिग्ध दिखाई दे रही है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की जवाबदेही का है।
छात्रावास में निगरानी की व्यवस्था कहां थी?
वार्डन और जिम्मेदार कर्मचारी क्या कर रहे थे?
महीनों तक किसी को कुछ पता नहीं चला या जानबूझकर आंखें बंद रखी गईं?
और सबसे अहम सवाल ,इन छात्राओं की इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है? क्योंकि गर्भवती होना कोई “एक दिन की घटना” नहीं है, यह लंबे समय की लापरवाही और संभवतः किसी गंभीर अपराध की ओर इशारा करता है।
यदि सरकार और प्रशासन इस मामले में सिर्फ औपचारिक जांच करके मामला ठंडे बस्ते में डाल देते हैं, तो यह न सिर्फ इन तीन छात्राओं के साथ अन्याय होगा बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर जनता का भरोसा भी टूटेगा।

बीजापुर की यह घटना केवल एक खबर नहीं है।
यह उस व्यवस्था का आईना है जो मंचों पर नैतिकता का भाषण देती है और जमीन पर बेटियों की सुरक्षा तक सुनिश्चित नहीं कर पाती।
अब देखना यह है कि इस मामले में सच सामने आएगा या फिर हमेशा की तरह “जांच” और “कार्रवाई” के सरकारी शब्दों के नीचे यह सच्चाई भी दफन हो जाएगी।

By Amit Mandavi

अमित कुमार मंडावी बालोद, छत्तीसगढ़ आधारित अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे जमीनी स्तर की सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे Chhattisgarhjunction.in के माध्यम से अपराध, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, ग्रामीण समस्याओं और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से सामने लाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed